बागजाला के विकास पर वन विभाग का ‘ब्रेक’, DFO कार्यालय पर किसान महासभा का धरना: देखें वीडियो

ख़बर शेयर करें

अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉 हल्द्वानी 👉 बागजाला के विकास पर वन विभाग का ‘ब्रेक’, DFO कार्यालय पर किसान महासभा का धरना
8 सूत्रीय मांगों पर हुई वार्ता, आश्वासन के बाद चेतावनी—समाधान न हुआ तो फिर होगा अनिश्चितकालीन आंदोलन
हल्द्वानी, 6 अप्रैल। बागजाला गांव के विकास कार्यों में वन विभाग द्वारा कथित रूप से बाधा डाले जाने के विरोध में सोमवार को अखिल भारतीय किसान महासभा, बागजाला कमेटी ने तराई पूर्वी वन प्रभाग, हल्द्वानी स्थित डीएफओ कार्यालय के बाहर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि गांव में जल जीवन मिशन, सड़क निर्माण, नहरों की मरम्मत, बिजली-पानी के नए कनेक्शन और अन्य जरूरी विकास कार्यों को वन विभाग की अनुमति न मिलने के कारण लंबे समय से रोका जा रहा है, जिससे गांव के लोग बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान हैं।
धरने को संबोधित करते हुए किसान महासभा के प्रदेश अध्यक्ष आनंद सिंह नेगी ने कहा कि बागजाला के लोग आज भी पानी, सड़क, सिंचाई और आवास जैसी मूलभूत जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं के तहत बजट स्वीकृत होने के बावजूद वन विभाग द्वारा अनुमति न दिए जाने के कारण गांव में विकास कार्य ठप पड़े हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बागजाला वासियों के 100 दिन के धरना आंदोलन के बाद 24 नवंबर 2025 को हल्द्वानी के उपजिलाधिकारी की मध्यस्थता में हुए समझौते में वन विभाग के प्रतिनिधि भी शामिल थे, लेकिन इसके बावजूद आज तक विकास कार्यों को मंजूरी नहीं दी गई। किसान महासभा ने इसे प्रशासनिक समझौते की भावना के खिलाफ बताया।
वरिष्ठ किसान नेता बहादुर सिंह जंगी ने कहा कि गांव के लोगों को पानी, सड़क और सिंचाई जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखना अन्यायपूर्ण है। वहीं किसान महासभा बागजाला कमेटी की अध्यक्ष डॉ. उर्मिला रैस्वाल ने कहा कि बागजाला की विकास योजनाओं को रोकना जनविरोधी कदम है और अब ग्रामीण इसे ज्यादा दिन तक सहन नहीं करेंगे।
धरने के बाद किसान महासभा के प्रतिनिधिमंडल और डीएफओ के बीच वार्ता हुई, जिसमें ग्रामीणों ने 8 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा। इनमें जल जीवन मिशन की पेयजल योजनाओं को तत्काल स्वीकृति, गांव की सड़कों की मरम्मत और निर्माण कार्यों को अनुमति, नहरों की मरम्मत कर सिंचाई सुविधा बहाल करने, बरसाती नहर किनारे पक्के रास्ते और किनारों की मरम्मत, बिजली और पानी के नए कनेक्शनों की अनुमति, विकास कार्यों में वन विभाग की बाधाएं समाप्त करने, स्ट्रीट/सोलर लाइट लगाने के पूर्व वादे को पूरा करने तथा ग्रामीणों को दिए गए पुराने नोटिस वापस लेने जैसी मांगें प्रमुख रहीं।


किसान महासभा ने बताया कि डीएफओ ने मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है। हालांकि संगठन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो बागजाला के ग्रामीण एक बार फिर अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू करने को बाध्य होंगे। संगठन ने कहा कि सोमवार का धरना केवल चेतावनी प्रदर्शन है और यदि वन विभाग की हठधर्मिता जारी रही तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।


धरना-प्रदर्शन में आनंद सिंह नेगी, बहादुर सिंह जंगी, डॉ. उर्मिला रैस्वाल, डॉ. कैलाश पाण्डेय, वेद प्रकाश, विमला रौथाण, विमला आर्य, ललित मटियाली, हेमा देवी, पंकज चौहान, गणेश राम, मीना भट्ट, प्रेम सिंह नयाल, मो. सुलेमान मलिक, रेशमा, परवेज अंसारी, धीरज कुमार, दिनेश आर्य, ललिता, ललित प्रसाद, जीवंती, अनीता अन्ना, उत्तम दास, रईस अहमद, दीवान सिंह बर्गली, नारायण दत्त जोशी समेत सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे।

 

error: Content is protected !!