अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉 रामनगर बन्नाखेड़ा 👉
जंगल बचाने की जंग में डटा वन विभाग, तस्करों-शिकारियों पर सख्त नजर
रामनगर बन्नाखेड़ा से उत्तराखंड जागरण ‘तीसरी आंख’ संपादक की खास रिपोर्ट
हरे-भरे जंगलों और वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर विभाग अलर्ट, लोगों से भी मांगा सहयोग |
रामनगर/बन्नाखेड़ा।
रामनगर के बन्नाखेड़ा क्षेत्र में जंगलों और वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर वन विभाग लगातार सक्रिय और सतर्क भूमिका में नजर आ रहा है। एक ओर जहां कुछ अवैध तस्कर और असामाजिक तत्व जंगलों को नुकसान पहुंचाने, पेड़ों की कटाई करने और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को उजाड़ने में लगे रहते हैं, वहीं दूसरी ओर वन विभाग लगातार कार्रवाई कर जंगलों को बचाने की जंग लड़ रहा है।

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उत्तराखंड जागरण ‘तीसरी आंख’ के संपादक अजय अनेजा द्वारा क्षेत्र का जायजा लेने पर यह साफ दिखाई दिया कि जंगलों की सुरक्षा केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण से जुड़ा एक बेहद गंभीर विषय है। मौके पर सामने आई तस्वीर यह बताती है कि यदि जंगलों को नुकसान पहुंचा, तो उसका सीधा असर न सिर्फ वन्यजीवों पर, बल्कि इंसानी जीवन और पर्यावरण संतुलन पर भी पड़ेगा।
अवैध कटान और शिकार पर विभाग की पैनी नजर
वन विभाग द्वारा समय-समय पर क्षेत्र में गश्त, निगरानी और अभियान चलाए जाते रहे हैं। विभाग की टीमों ने कई बार जंगलों को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों और अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों पर कार्रवाई भी की है। इससे यह स्पष्ट होता है कि वन विभाग केवल कागजों में नहीं, बल्कि जमीन पर भी अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, जंगलों में अवैध कटान, वन संपदा की चोरी और वन्यजीवों के शिकार जैसी गतिविधियों को रोकने के लिए विभाग लगातार अलर्ट मोड में कार्य कर रहा है। संवेदनशील क्षेत्रों में नजर रखी जा रही है ताकि जंगलों की हरियाली और वन्यजीवों की सुरक्षा बनी रहे।
जंगल कटेंगे तो बढ़ेगा मानव-वन्यजीव संघर्ष
विशेषज्ञों का मानना है कि जंगल केवल पेड़ों का समूह नहीं, बल्कि जंगली जानवरों का घर और प्रकृति का संतुलन केंद्र हैं। जब जंगलों को काटा जाता है, तो सबसे पहले वन्यजीवों का सुरक्षित आवास खत्म होता है। यही कारण है कि कई बार जंगली जानवर भोजन और आश्रय की तलाश में आबादी की ओर रुख कर लेते हैं।
ऐसी स्थिति में अक्सर जानवरों को दोषी ठहराया जाता है, जबकि वास्तविकता यह है कि उनके घरों में दखल इंसान ही देता है। वन विभाग इसी खतरे को कम करने के लिए जंगलों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है।
वन विभाग की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण
बन्नाखेड़ा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में वन विभाग की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है, क्योंकि यहां जंगलों का संरक्षण सीधे वन्यजीवों और पर्यावरण संतुलन से जुड़ा हुआ है। विभाग की मुस्तैदी का ही परिणाम है कि जंगलों को नुकसान पहुंचाने वालों पर समय-समय पर अंकुश लगाया जाता रहा है।
वन विभाग की यह कार्यशैली यह संदेश देती है कि यदि जंगलों को बचाना है, तो सख्त निगरानी और त्वरित कार्रवाई बेहद जरूरी है।
‘तीसरी आंख’ संपादक अजय अनेजा की अपील
मौके से कवरेज करते हुए उत्तराखंड जागरण ‘तीसरी आंख’ के संपादक अजय अनेजा ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि:
“जंगल हमारी प्राकृतिक धरोहर हैं। इन्हें बचाना हम सबकी जिम्मेदारी है। वन विभाग लगातार अपनी भूमिका निभा रहा है, लेकिन जब तक समाज भी जागरूक होकर साथ नहीं देगा, तब तक इस लड़ाई को पूरी तरह नहीं जीता जा सकता।”
उन्होंने कहा कि जंगलों को हरा-भरा रहने देना ही आने वाली पीढ़ियों के लिए सबसे बड़ा निवेश है। पेड़ केवल लकड़ी नहीं, बल्कि जीवन, ऑक्सीजन और पर्यावरण संतुलन का आधार हैं।
जनता का सहयोग ही बनेगा सबसे बड़ी ताकत
वन विभाग की कार्रवाई तभी और प्रभावी होगी, जब आमजन भी जंगलों को बचाने की मुहिम में सहभागी बनें। यदि कहीं अवैध कटान, शिकार, संदिग्ध गतिविधि या जंगलों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश दिखाई दे, तो उसकी सूचना तुरंत संबंधित विभाग को दी जानी चाहिए।
निष्कर्ष
रामनगर बन्नाखेड़ा क्षेत्र में वन विभाग जंगलों और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए पूरी गंभीरता से जुटा हुआ है। अब जरूरत इस बात की है कि समाज भी इस मुहिम में अपनी जिम्मेदारी समझे और जंगलों को बचाने में आगे आए। क्योंकि जंगल बचेंगे, तभी वन्यजीव बचेंगे… और वन्यजीव बचेंगे, तभी प्रकृति और मानव जीवन दोनों सुरक्षित रहेंगे।
उत्तराखंड जागरण ‘तीसरी आंख’ की खास अपील:
“जंगलों को मत उजाड़िए… यही प्रकृति की सांस हैं, यही वन्यजीवों का घर हैं।”







