अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉 लालकुआं 👉
लालकुआं रेलवे में बड़ी लापरवाही, पीछे लुढ़का ब्रेक-एंड डिब्बा पटरी से उतरा
करीब 125 मीटर पीछे चला जनरेटर/ब्रेक-एंड डिब्बा, कर्मचारियों के प्रयास के बावजूद लाइन से उतरा, बड़ा हादसा टला
लालकुआं। लालकुआं रेलवे स्टेशन क्षेत्र में रेलवे विभाग की एक गंभीर
लापरवाही
उस समय सामने आ गई, जब एक गाड़ी के पीछे लगा जनरेटर/ब्रेक-एंड डिब्बा अचानक अपनी जगह से करीब सवा सौ मीटर (लगभग 125 मीटर) पीछे की ओर अपने आप चल पड़ा। इस अप्रत्याशित घटना से मौके पर अफरा-तफरी मच गई और कुछ देर के लिए रेलवे परिसर में हड़कंप का माहौल बन गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, डिब्बा धीरे-धीरे पीछे की ओर खिसकना शुरू हुआ, जिसके बाद वहां मौजूद रेलवे कर्मचारियों ने उसे रोकने का प्रयास भी किया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद डिब्बा नियंत्रित नहीं हो सका। बताया जा रहा है कि पीछे की ओर लुढ़कता हुआ यह डिब्बा आगे जाकर पॉइंट (टर्नआउट) के पास पटरी से नीचे उतर गया। घटना के बाद जो स्थिति सामने आई, उसने रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, डिब्बे का पहिया लाइन से करीब डेढ़ फीट दूर जा पहुंचा था। यदि डिब्बे की रफ्तार थोड़ी और अधिक होती या वह किसी दूसरी सक्रिय लाइन की ओर बढ़ जाता, तो यह मामला एक भीषण रेल हादसे का रूप ले सकता था। गनीमत रही कि समय रहते स्थिति पर नियंत्रण पा लिया गया और एक बड़ी दुर्घटना टल गई।

इस पूरे घटनाक्रम ने रेलवे विभाग की सुरक्षा प्रणाली, निगरानी व्यवस्था, तकनीकी रखरखाव और जिम्मेदार कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों और मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि रेलवे जैसे संवेदनशील विभाग में इस प्रकार की घटना होना बेहद गंभीर मामला है। यदि ट्रैक पर खड़े या जुड़े डिब्बों की सुरक्षा, ब्रेकिंग सिस्टम और लॉकिंग व्यवस्था पूरी तरह दुरुस्त होती, तो संभवतः यह स्थिति उत्पन्न ही नहीं होती।

सूत्रों के अनुसार, प्रथम दृष्टया मामला तकनीकी खामी, ब्रेकिंग सिस्टम में कमी, या संचालन में बरती गई लापरवाही से जुड़ा माना जा रहा है। हालांकि रेलवे विभाग की ओर से घटना के वास्तविक कारणों को लेकर अभी तक कोई स्पष्ट आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। वहीं घटना के बाद रेलवे के संबंधित अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंचकर निरीक्षण में जुट गए तथा डिब्बे को सुरक्षित स्थिति में लाने और ट्रैक की जांच का कार्य शुरू कर दिया गया।
यह घटना केवल एक तकनीकी गड़बड़ी भर नहीं, बल्कि रेलवे की आंतरिक सुरक्षा तैयारियों की पोल खोलने वाली बड़ी चेतावनी के रूप में देखी जा रही है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि ऐसी घटनाओं को गंभीरता से लेकर समय रहते जवाबदेही तय नहीं की गई, तो भविष्य में इससे भी बड़ा हादसा हो सकता है। लोगों ने मांग की है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि आखिर डिब्बा अपनी जगह से अपने आप पीछे कैसे चला गया और इस संभावित हादसे के लिए जिम्मेदार कौन है।
फिलहाल इस घटना के बाद रेलवे विभाग की कार्यप्रणाली पर सवालों का दौर तेज हो गया है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या रेलवे प्रशासन इस गंभीर लापरवाही पर केवल औपचारिक जांच कर मामले को शांत करेगा, या फिर वास्तव में जिम्मेदार लोगों पर ठोस कार्रवाई भी की जाएगी।
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