उत्तराखंड जागरण पर बड़ी खबर 104.57 करोड़ बिजली बिल बकाया, यूपीसीएल ने सरकारी विभागों की सूची की सार्वजनिक : जरूर पढ़ें

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अजय अनेजा 👉 संपादक उत्तराखंड जागरण 👉 की विशेष खबर 👉उत्तराखंड में सरकारी विभागों पर 104.57 करोड़ का बिजली बिल बकाया, उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड ने सार्वजनिक की सूची

देहरादून। उत्तराखंड की विद्युत व्यवस्था से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। राज्य के विभिन्न सरकारी विभागों और कुछ निजी औद्योगिक इकाइयों पर कुल 104.57 करोड़ रुपये से अधिक का बिजली बिल बकाया हो गया है। इस पर सख्त रुख अपनाते हुए उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) ने बकाएदारों की सूची अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक कर दी है।

निगम ने यह भी स्पष्ट किया है कि अब प्रत्येक माह बकाया राशि की अद्यतन सूची प्रकाशित की जाएगी, ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।

किन विभागों पर सबसे अधिक बकाया

2 मार्च 2026 तक के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जल संस्थान और सिंचाई विभाग पर सर्वाधिक देनदारी दर्ज की गई है।

अल्मोड़ा जनपद में जल संस्थान के एक ही खाते पर 10.34 करोड़ रुपये लंबित हैं, जो राज्य के सबसे बड़े बकाया खातों में शामिल है।

टिहरी गढ़वाल में पेयजल निगम पर 4.52 करोड़ रुपये से अधिक की देनदारी है।

हरिद्वार जनपद के ज्वालापुर डिवीजन में गंगा परियोजना के एक प्रोजेक्ट मैनेजर पर 4.49 करोड़ रुपये तथा एक अन्य परियोजना प्रबंधक पर 2.16 करोड़ रुपये बकाया हैं।

रुड़की क्षेत्र में एक निजी औद्योगिक इकाई पर 3.75 करोड़ रुपये की देनदारी दर्ज की गई है।

देहरादून में जलकल अभियंता के एक खाते पर 1.63 करोड़ रुपये से अधिक बकाया है, जबकि गंगा प्रदूषण नियंत्रण परियोजना पर भी एक करोड़ रुपये से अधिक की राशि लंबित है।

क्यों गंभीर है स्थिति

यूपीसीएल के अनुसार बढ़ते बकाये से निगम पर वित्तीय दबाव बढ़ रहा है। इससे बिजली आपूर्ति, रखरखाव, अवसंरचना उन्नयन और नई परियोजनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

यदि समय पर भुगतान नहीं हुआ तो संबंधित विभागों की विद्युत आपूर्ति प्रभावित की जा सकती है। इससे आम जनता को भी अप्रत्यक्ष रूप से असुविधा का सामना करना पड़ सकता है।

आगे क्या

यूपीसीएल प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि भुगतान में लापरवाही बरतने वाले विभागों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। निगम की अगली समीक्षा रिपोर्ट अप्रैल 2026 के प्रथम सप्ताह में जारी की जाएगी।

यह मामला शासन-प्रशासन की वित्तीय अनुशासन प्रणाली और सार्वजनिक संसाधनों के प्रबंधन पर महत्वपूर्ण प्रश्न खड़ा करता है। अब देखना यह होगा कि संबंधित विभाग समय पर बकाया राशि का भुगतान कर राज्य की विद्युत व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में कितनी तत्परता दिखाते हैं।

 

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