बिंदुखत्ता 👉 प्रश्न कब जागेगा शिक्षा विभाग? स्कूली बच्चे परेशान

ख़बर शेयर करें

अजय अनेजा 👉 संपादक 👉 उत्तराखंड जागरण 👉 लालकुआं 👉 बिंदुखत्ता 👉

10 बजे सरकारी स्कूल के हाल ,
(ये स्कूल बिंदुखत्ता का है )
जब बच्चा पढ़ाई से नहीं,
पढ़ाई बच्चों से दूर होने लगे।
यह तस्वीर सवाल नहीं करती,
यह रोती है…
यह कहती है —
“हमें समय पर आने की सीख दी जाती है,
लेकिन क्या सिस्टम समय पर जागता है?”
अगर आज भी यह ताला नहीं खुला,
तो कल सिर्फ स्कूल नहीं बंद होंगे…
भविष्य भी धीरे-धीरे बंद हो जाएगा।
10 बजने वाले हैं… लेकिन ताले में कैद है बच्चों का भविष्य
सुबह की ठंडी हवा में कांपते हाथ, सिर पर ऊनी टोपी, कंधों पर भारी स्कूल बैग…
लेकिन स्कूल पहुंचते ही उनके सपनों के सामने एक ही सच्चाई खड़ी थी — लोहे का बंद गेट और उस पर लटका ताला।
कोई बच्चा जाली पकड़कर अंदर झांक रहा है, जैसे पूछ रहा हो —
“आज पढ़ाई होगी या नहीं?”
कोई मासूम आंखें सड़क की ओर टिकाए खड़ा है, शायद किसी शिक्षक के आने की उम्मीद में।

ये सिर्फ एक बंद स्कूल नहीं है।
ये उस सिस्टम का आईना है, जहां बच्चों का इंतज़ार मायने नहीं रखता।
जहां शिक्षा का समय तय है, लेकिन जिम्मेदारी का नहीं।
सोचिए…
इन बच्चों के माता-पिता मेहनत-मजदूरी छोड़कर उन्हें स्कूल भेजते हैं।
कई घरों में यही उम्मीद होती है कि “हम नहीं पढ़ पाए, हमारा बच्चा तो पढ़े।”
और बदले में बच्चों को मिलता है — एक बंद दरवाज़ा।
आज अगर समय से स्कूल नहीं खुला, तो सिर्फ एक दिन की पढ़ाई नहीं रुकी…
आज एक बच्चे का भरोसा टूटा है।
आज किसी ने मन ही मन तय कर लिया होगा —
“चलो, कल नहीं आएंगे।”

BEO, DEO साहब से अनुरोध है गांव के सरकारी स्कूलों में छापे मारे जाएं, मैं पहले भी BEO सर को बता चुका हु लेकिन कहीं कोई कार्रवाई नहीं

 

error: Content is protected !!