टांडा वन क्षेत्र में जंगलों का सफाया🥺तराई केंद्रीय वन प्रभाग रुद्रपुर के लालकुआं धड़ल्ले से कट रहे पेड़

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अजय अनेजा 👉 संपादक 👉 उत्तराखंड जागरण 👉 लालकुआं 👉टांडा वन क्षेत्र में जंगलों का सफाया🥺तराई केंद्रीय वन प्रभाग रुद्रपुर के लालकुआं धड़ल्ले से कट रहे पेड़ 🤔रुद्रपुर। लालकुआ तराई केंद्रीय वन प्रभाग अंतर्गत टांडा वन क्षेत्र में खुलेआम पेड़ों की कटाई से जंगलों का तेजी से सफाया किया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि इतनी गंभीर स्थिति के बावजूद जिम्मेदार वन विभाग गहरी नींद में सोया हुआ नजर आ रहा है। अवैध कटान का यह खेल लंबे समय से चल रहा है, लेकिन न तो मौके पर सख्त निगरानी दिखाई दे रही है और न ही दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई।

स्थानीय लोगों का कहना है कि रात के अंधेरे में हरे-भरे पेड़ों पर आरी चलती है और सुबह तक लकड़ी गायब हो जाती है। जंगलों की सुरक्षा के लिए तैनात अमला या तो सब कुछ जानते हुए भी अनजान बना हुआ है या फिर मिलीभगत के आरोपों से घिरता जा रहा है। वन संपदा की इस लूट से न केवल पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास भी खतरे में पड़ गया है।

 

पेड़ों की अंधाधुंध कटाई से क्षेत्र में तापमान बढ़ने, भू-क्षरण और जैव विविधता पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका गहराती जा रही है। इसके बावजूद तराई केंद्रीय वन प्रभाग के अधिकारी चुप्पी साधे बैठे हैं। न नियमित गश्त हो रही है और न ही वन माफियाओं पर लगाम कसने के ठोस प्रयास नजर आते हैं।

सबसे गंभीर सवाल यह है कि क्या शासन तक सही जानकारी पहुंचाई जा रही है या फिर कागजों में सब कुछ ठीक दिखाकर शासन को “चुना” लगाया जा रहा है। यदि समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले समय में टांडा वन क्षेत्र केवल नाम का जंगल रह जाएगा।

अब पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों की मांग है कि शासन इस मामले का संज्ञान ले, उच्चस्तरीय जांच कराए और दोषी अधिकारियों व वन माफियाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे, ताकि जंगलों को बचाया जा सके और आने वाली पीढ़ियों को हरियाली का तोहफा मिल सके।

 

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