अजय अनेजा 👉 संपादक उत्तराखंड जागरण 👉 रुद्रपुर 👉
📰 खनन सुधारों से उत्तराखंड को ऐतिहासिक लाभ, 300 से 1200 करोड़ पहुँचा राजस्व
75 वर्ष की उम्र और 60 साल के अनुभव के साथ उद्योगपति शिवकुमार अग्रवाल ने सरकार की मिनरल पॉलिसी को बताया देश की सर्वश्रेष्ठ
रुद्रपुर।
उत्तराखंड के प्रसिद्ध उद्योगपति, समाजसेवी एवं कुमार ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज के स्वामी श्री शिवकुमार अग्रवाल ने आज रुद्रपुर में प्रेस को संबोधित करते हुए उत्तराखंड की वर्तमान मिनरल एवं माइनिंग पॉलिसी का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने खनन और पर्यटन जैसे अहम विषयों पर अपने 60 वर्षों के व्यावसायिक अनुभव के आधार पर विस्तृत जानकारी पत्रकारों के समक्ष रखी।
श्री अग्रवाल ने बताया कि उनकी उम्र 75 वर्ष है और वे वर्ष 1966 से लगातार व्यापार जगत से जुड़े हुए हैं। उनकी कंपनी LSC Infratech Ltd पिछले 35 वर्षों से उत्तराखंड में मिनरल एवं माइनिंग सेक्टर में कार्य कर रही है और आज यह एशिया की सबसे बड़ी मिनरल प्रोसेसिंग कंपनी है। कंपनी की उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और आंध्र प्रदेश में 10 यूनिट्स, जबकि देशभर में कुल 16 व्यावसायिक इकाइयाँ हैं, जिनसे लगभग 2000 प्रोफेशनल पार्टनर्स जुड़े हुए हैं।
उन्होंने उत्तराखंड की मिनरल पॉलिसी पर हो रही आलोचनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पिछले डेढ़ साल में खनन से राज्य सरकार को मिलने वाला राजस्व चार गुना बढ़कर 300 करोड़ से 1200 करोड़ रुपये हो गया है, जो उनके 35 वर्षों के अनुभव में पहली बार हुआ है। यह राशि सीधे प्रदेश के विकास कार्यों में उपयोग हो रही है।
श्री अग्रवाल ने कहा कि पहले सिस्टम की कमजोरियों के कारण मिनरल की लीकेज और चोरी होती थी, जिससे न सरकार को लाभ मिल रहा था और न ही स्टोन क्रशिंग इंडस्ट्री को। उद्योग केवल व्यवस्था और विभिन्न विभागों के लिए काम कर रहा था, लेकिन आज हालात पूरी तरह बदल चुके हैं।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में उत्तराखंड में करीब 400 स्टोन क्रशिंग इकाइयाँ संचालित हैं, जो राज्य का सबसे अधिक रोजगार देने वाला उद्योग है। इस सेक्टर से लगभग 7 लाख परिवारों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला हुआ है।
स्टोन क्रशिंग उद्योग से सरकार को रॉयल्टी, फॉरेस्ट ट्रांजिट, जीएसटी, आयकर और आरटीओ टैक्स के रूप में प्रतिवर्ष लगभग 10,000 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हो रहा है। अकेले जीएसटी से करीब 4500 करोड़, आबकारी से 2300 करोड़ और आरटीओ से 1600 करोड़ रुपये की आय हो रही है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जब माइनिंग विभाग ने उन्हें टेंडर प्रक्रिया के तहत रॉयल्टी कलेक्शन में भाग लेने के लिए संपर्क किया, तो उन्होंने इसे एक अत्यंत कठिन और जोखिमपूर्ण प्रक्रिया बताते हुए मना कर दिया।
श्री अग्रवाल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और खनन विभाग की टीम की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनके द्वारा किए गए बड़े सुधारों से यह सेक्टर अनऑर्गनाइज्ड से ऑर्गनाइज्ड हुआ है। करप्शन और अनियमितताएं समाप्त हुई हैं, ग्राहकों को मिनरल सस्ता मिल रहा है और ट्रांसपोर्ट व इंडस्ट्री को वास्तविक लाभ मिलने लगा है।
उन्होंने यह भी बताया कि उत्तराखंड के स्टोन क्रशर उद्योग ने तकनीकी शोध कर एम-सैण्ड और कोरसैण्ड निर्माण की तकनीक विकसित की, जिसकी प्रस्तुति उनकी कंपनी LSC Infratech ने अन्य राज्यों को दी और आज कई राज्य उसी मॉडल पर अपनी एम-सैण्ड पॉलिसी बना रहे हैं।
खनन सुधारों के बाद मिनरल मार्केट का दायरा बढ़कर उत्तर प्रदेश में 150 किलोमीटर तक पहुँच गया है, जो उत्तराखंड के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।
उन्होंने कहा कि इस इंडस्ट्री से जो भी राजस्व और मुनाफा होता है, वह पूरी तरह उत्तराखंड में ही खर्च होता है, जबकि अन्य कई उद्योगों का मुनाफा राज्य से बाहर चला जाता है। इसलिए खनन उद्योग उत्तराखंड के आर्थिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
अंत में उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि शहरों के बीचों-बीच संचालित पुराने स्टोन क्रशरों को आबादी से बाहर स्थानांतरित किया जाए और सरकारी भूमि पर स्टोन क्रशर जोन घोषित कर भविष्य की ठोस योजना बनाई जाए।
उन्होंने दोहराते हुए कहा कि उत्तराखंड की वर्तमान मिनरल पॉलिसी समाज, उद्योग और प्रदेश—तीनों के हित में देश की सबसे बेहतरीन नीति है।







