अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉 हल्द्वानी 👉 लालकुआं 👉 हल्दुचौड़ं 👉 बिन्दुखत्ता 👉
स्कूल-बुक माफिया पर डीएम का डंडा: हल्द्वानी में बुक सेलर्स पर छापे, ‘दुकान विशेष’ की स्लिप देने वाले स्कूलों पर नोटिस की तैयारी
हल्द्वानी। जिला मजिस्ट्रेट नैनीताल के निर्देशों के क्रम में शनिवार को हल्द्वानी नगर क्षेत्र में स्कूलों और बुक सेलर्स की मनमानी पर बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रशासन ने तीन अलग-अलग टीमों के माध्यम से शहर के प्रमुख बुक डिपो और पुस्तक विक्रेताओं पर सघन जांच अभियान चलाया। जांच के दौरान कई गंभीर तथ्य सामने आए, जिनमें कुछ विद्यालयों द्वारा अभिभावकों को दुकान विशेष से किताबें खरीदने के लिए स्लिप देना, एनसीईआरटी से इतर महंगी किताबें चलाना, तथा प्ले ग्रुप से यूकेजी तक कक्षाएं संचालित करने वाले कुछ विद्यालयों की मान्यता और पंजीकरण पर सवाल शामिल हैं।
प्रशासन की इस कार्रवाई ने शहर में लंबे समय से चल रही स्कूल-बुक गठजोड़ की शिकायतों को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। निरीक्षण के दौरान मौके पर मौजूद अभिभावकों से भी फीडबैक लिया गया, जिसमें कई अभिभावकों ने खुलकर बताया कि कुछ स्कूल बच्चों की किताबें खरीदने के लिए निर्धारित दुकानों की पर्ची थमा रहे हैं, जिससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है और बाजार में प्रतिस्पर्धा भी खत्म हो रही है।
तीन टीमों ने शहर के प्रमुख बुक डिपो खंगाले
जांच के लिए गठित तीनों टीमों में प्रशासन, शिक्षा विभाग और राज्य कर विभाग के अधिकारी शामिल रहे।
नगर मजिस्ट्रेट हल्द्वानी के नेतृत्व में गठित टीम ने वर्धमान बुक डिपो, पूरणमल एंड संस बुक डिपो तथा करियर जोन (कालाढूंगी रोड) का निरीक्षण किया।
वहीं उपजिलाधिकारी हल्द्वानी की टीम ने पूरणमल एंड संस (मंगलपड़ाव), दीक्षा बुक डिपो, टुडे बुक डिपो और पी. कुमार का निरीक्षण किया।
इसके अलावा तहसीलदार हल्द्वानी की टीम ने कंसल बुक डिपो और प्रीत बुक डिपो की जांच की।
निरीक्षण के दौरान टीमों ने सभी बुक सेलर्स से विभिन्न विद्यालयों में प्रचलित पुस्तकों की सूची और रेट लिस्ट तलब की। इन सूचियों के प्रारंभिक परीक्षण में कई ऐसे बिंदु सामने आए, जिन पर अब शिक्षा विभाग और प्रशासनिक स्तर पर आगे की कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी गई है।
प्ले ग्रुप से यूकेजी तक चल रही कक्षाएं, अब मान्यता-पंजीकरण की होगी जांच
जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि कुछ विद्यालय प्ले ग्रुप, प्री-नर्सरी, एलकेजी और यूकेजी जैसी कक्षाओं का संचालन कर रहे हैं। प्रशासन ने इस पर गंभीरता दिखाते हुए शिक्षा विभाग को निर्देश दिए हैं कि ऐसे विद्यालयों की मान्यता, पंजीकरण और संचालन की वैधानिक स्थिति की जांच की जाए।
यह बिंदु इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि कई निजी विद्यालय बिना स्पष्ट नियमों के प्रारंभिक कक्षाओं के नाम पर अभिभावकों से भारी फीस और महंगी पुस्तकें वसूलने के आरोपों में पहले भी घिरते रहे हैं।
एनसीईआरटी के नाम पर खेल! अतिरिक्त किताबों का मूल्य ज्यादा, औचित्य पर सवाल
बुक सेलर्स से प्राप्त पुस्तकों की सूची और रेट लिस्ट की जांच में यह भी सामने आया कि कुछ विद्यालय ऐसे विषयों की किताबें भी बच्चों पर थोप रहे हैं, जिनकी पुस्तकें एनसीईआरटी द्वारा प्रकाशित ही नहीं की जातीं। शिक्षा विभाग को ऐसे विषयों और पुस्तकों के औचित्य की जांच के निर्देश दिए गए हैं।
इसके अलावा, इन अतिरिक्त पुस्तकों की कीमतों की तुलना करने पर पाया गया कि इनका मूल्य एनसीईआरटी पुस्तकों से काफी अधिक है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ऐसी किताबों को एनसीईआरटी पुस्तकों के समकक्ष नहीं माना जा सकता, और यदि विद्यालय अनावश्यक रूप से महंगी पुस्तकें चलाते पाए गए तो उनके खिलाफ नोटिस जारी करने हेतु रिपोर्ट भेजी जाएगी।
रेंडम सैंपल जब्त, ISBN नंबर से होगा सत्यापन
कार्रवाई के दौरान उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा द्वारा अधिकृत एनसीईआरटी पुस्तकों के रेंडम सैंपल भी दुकानों से एकत्र किए गए। इन पुस्तकों के आईएसबीएन नंबर और अन्य विवरणों का सत्यापन कराया जाएगा। यह समस्त सामग्री अब मुख्य शिक्षा अधिकारी को भेजी जा रही है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि विद्यालयों में वास्तव में कौन-सी पुस्तकें अधिकृत रूप से चल रही हैं और किनके नाम पर अतिरिक्त वसूली की जा रही है।
बुक सेलर्स के बिल भी खंगाले, राज्य कर विभाग को दिए गए जांच के निर्देश
निरीक्षण के दौरान प्रशासन ने केवल किताबों की सूची और स्कूलों के नेटवर्क की ही पड़ताल नहीं की, बल्कि बुक सेलर्स के बिलों और लेन-देन संबंधी अभिलेखों की भी जांच की। इस मामले में राज्य कर विभाग के अधिकारियों को विस्तृत परीक्षण और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। माना जा रहा है कि इस जांच के जरिए किताबों की बिक्री, बिलिंग और टैक्स से जुड़े कई पहलुओं की भी पड़ताल होगी।
दुकानों को भी हिदायत: पानी, कुर्सी और शेड की व्यवस्था करें
अभिभावकों की भीड़ और बच्चों के साथ खरीदारी की परेशानी को देखते हुए प्रशासन ने सभी बुक सेलर्स को निर्देश दिए कि वे अपने ग्राहकों के लिए पीने के पानी, वेटिंग चेयर्स, शेड और बुनियादी सुविधाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करें।

साथ ही, शिक्षा विभाग द्वारा पूर्व में जारी उस सर्कुलर को भी सभी दुकानों पर चस्पा कराया गया, जिसमें 20 अप्रैल 2026 तक गणवेश और पुस्तकों की अनिवार्यता से छूट देने तथा पठन-पाठन बाधित न करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का साफ संदेश है कि किताब और यूनिफॉर्म के नाम पर बच्चों की पढ़ाई को किसी भी हाल में बाधित नहीं होने दिया जाएगा।
ये अधिकारी रहे मौजूद
निरीक्षण के दौरान खंड शिक्षा अधिकारी गीतिका जोशी, सहायक आयुक्त अश्वनी सिंह, गौतम भंडारी, कुंदन पांगती, प्रधानाचार्य आशीष शर्मा, राजेन्द्र सिंह समेत अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।







