बिंदुखत्ता स्थित बहुचर्चित हल्द्वानी स्टोन क्रेशर के प्रदूषण से भड़के ग्रामीण, प्रशासन को सौंपा ज्ञापन; कार्रवाई न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी: देखें वीडियो

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अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉
बिंदुखत्ता स्थित बहुचर्चित हल्द्वानी स्टोन क्रेशर पर फूटा बिंदुखत्ता-लालकुआं का गुस्सा, प्रदूषण से त्रस्त लोगों ने सौंपा ज्ञापन
धूल, शोर, गंदे पानी, जर्जर सड़कों और बीमारियों के खतरे का आरोप; प्रशासन से तत्काल जांच और सख्त कार्रवाई की मांग
लालकुआं/बिंदुखत्ता।
बिंदुखत्ता-लालकुआं क्षेत्र में संचालित हल्द्वानी स्टोन क्रेशर के खिलाफ स्थानीय लोगों का आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है। क्षेत्रवासियों ने क्रेशर संचालन से फैल रहे ध्वनि प्रदूषण, वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, उड़ती धूल, जर्जर सड़कों, भारी वाहनों की अनियंत्रित आवाजाही और जनस्वास्थ्य पर पड़ रहे गंभीर असर को लेकर प्रशासन को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए तत्काल सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।


स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से क्रेशर से निकलने वाली पत्थर की धूल, मिट्टी और सूक्ष्म कण आसपास के आवासीय इलाकों तक पहुंच रहे हैं, जिससे लोगों को सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन, खांसी, एलर्जी और त्वचा संबंधी समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि यह स्थिति विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से बीमार लोगों के लिए बेहद खतरनाक बनती जा रही है।
क्षेत्रवासियों ने आरोप लगाया है कि क्रेशर परिसर और उसके आसपास से गुजरने वाले भारी वाहनों की लगातार आवाजाही के कारण पूरे इलाके में दिनभर असहनीय शोर बना रहता है। इससे न केवल लोगों की मानसिक शांति भंग हो रही है, बल्कि क्षेत्र में दुर्घटनाओं की आशंका भी लगातार बनी हुई है। लोगों का कहना है कि भारी वाहनों की आवाजाही से आम नागरिकों, स्कूली बच्चों और राहगीरों को रोजाना खतरे का सामना करना पड़ रहा है।
ज्ञापन में जल प्रदूषण और गंदे पानी के जमाव को भी गंभीर मुद्दा बताया गया है। लोगों का आरोप है कि क्रेशर के आसपास नालियों और गड्ढों में पानी जमा रहने, कीचड़ और गंदगी के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है, जिससे संक्रामक और मौसमी बीमारियों का खतरा भी तेजी से बढ़ा है। साथ ही, क्रेशर से जुड़े भारी वाहनों के कारण क्षेत्र की सड़कें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं, जिससे आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ज्ञापन में साफ तौर पर कहा गया है कि यह पूरा इलाका घनी आबादी वाला आवासीय क्षेत्र है, जहां बड़ी संख्या में परिवार रहते हैं। ऐसे में क्रेशर से उत्पन्न प्रदूषण और अव्यवस्था ने जनजीवन, पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य को गहरे संकट में डाल दिया है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि समय रहते स्थिति पर नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाले समय में यह समस्या और भी भयावह रूप ले सकती है।
ज्ञापन के माध्यम से लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि हल्द्वानी स्टोन क्रेशर की तत्काल उच्च स्तरीय जांच कराई जाए तथा इसके संचालन की वैधता, पर्यावरणीय स्वीकृतियों, प्रदूषण नियंत्रण मानकों, सुरक्षा प्रावधानों और वाहनों की आवाजाही की विस्तृत जांच की जाए। साथ ही, यदि किसी भी प्रकार के मानकों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाए।
क्षेत्रवासियों ने यह भी मांग उठाई है कि क्रेशर क्षेत्र में धूल और प्रदूषण नियंत्रण के प्रभावी उपाय तत्काल लागू किए जाएं, भारी वाहनों की अनियंत्रित आवाजाही पर रोक लगाई जाए, क्षतिग्रस्त सड़कों का पुनर्निर्माण कराया जाए और पूरे इलाके की स्वास्थ्य एवं पर्यावरणीय निगरानी नियमित रूप से सुनिश्चित की जाए।
ज्ञापन में यह चेतावनी भी दी गई है कि यदि प्रशासन ने जल्द प्रभावी कदम नहीं उठाए, तो क्षेत्रवासी आने वाले दिनों में बड़े जनआंदोलन के लिए बाध्य होंगे। फिलहाल अब सबकी निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं कि आखिर जनस्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर जिम्मेदार विभाग कितनी तत्परता दिखाते हैं।

 

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