अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉 धाकड़ धामी के नेतृत्व में दिव्य-भव्य होगा हरिद्वार कुंभ-2027, उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई से समसामयिक विषयों पर हुई अहम चर्चा

देहरादून/हरिद्वार/रुद्रप्रयाग। देवभूमि उत्तराखंड एक बार फिर विश्व आस्था के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक हरिद्वार कुंभ-2027 की तैयारियों को लेकर सुर्खियों में है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में आगामी कुंभ मेले को दिव्य, भव्य, सुरक्षित और सुव्यवस्थित स्वरूप देने के लिए शासन-प्रशासन व्यापक स्तर पर तैयारियों में जुटा हुआ है। सरकार का लक्ष्य है कि देश-विदेश से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को ऐसा कुंभ अनुभव मिले, जिसमें आस्था, परंपरा और आधुनिक व्यवस्थाओं का अद्भुत संगम देखने को मिले।
हरिद्वार कुंभ-2027 केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, भारतीय परंपरा और आध्यात्मिक चेतना का विराट उत्सव होगा। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन द्वारा यातायात, पार्किंग, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं, स्वच्छता, घाटों की व्यवस्था, आवासीय सुविधाएं, प्रकाश व्यवस्था, डिजिटल मॉनिटरिंग और आपदा प्रबंधन जैसे सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विशेष फोकस किया जा रहा है। प्रदेश सरकार का स्पष्ट उद्देश्य है कि कुंभ मेले के दौरान श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े और वे सहज, सुरक्षित तथा श्रद्धापूर्वक इस महापर्व में सहभागिता कर सकें।
इसी आध्यात्मिक परंपरा की जीवंत मिसाल रुद्रप्रयाग जनपद के बीरों देवल में स्थित माँ चण्डिका देवी मंदिर भी है, जो आज हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण इस पावन स्थल पर पहुंचकर श्रद्धालु आध्यात्मिक शांति, दिव्य ऊर्जा और सकारात्मक अनुभूति का अनुभव करते हैं। मंदिर की धार्मिक गरिमा, शांत वातावरण और यहाँ की विशिष्ट पूजा-अर्चना परंपरा श्रद्धालुओं को विशेष रूप से आकर्षित करती है। स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूर-दराज़ से आने वाले भक्त भी माता के दर्शन और आशीर्वाद के लिए यहां पहुंचते हैं। यह मंदिर देवभूमि उत्तराखंड की उसी सनातन आस्था का प्रतीक है, जो कुंभ जैसे महाआयोजनों की आत्मा मानी जाती है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, जिन्हें प्रदेश में उनकी तेज़ कार्यशैली और निर्णायक नेतृत्व के कारण “धाकड़ धामी” के नाम से भी जाना जाता है, लगातार कुंभ-2027 की तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं। उनकी प्राथमिकता है कि यह आयोजन केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि प्रबंधन, सुरक्षा और सुविधाओं के स्तर पर भी एक आदर्श आयोजन के रूप में स्थापित हो। इसी क्रम में मुख्यमंत्री धामी से उनके शासकीय आवास पर उप सेना प्रमुख (स्ट्रेटजी) लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर दोनों के बीच विभिन्न समसामयिक, रणनीतिक और राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर चर्चा हुई।
जानकारों का मानना है कि उत्तराखंड जैसे सामरिक, धार्मिक और भौगोलिक दृष्टि से महत्वपूर्ण राज्य में इस प्रकार की उच्चस्तरीय मुलाकातें कई मायनों में अहम होती हैं। विशेष रूप से जब राज्य एक ऐसे वैश्विक धार्मिक आयोजन की तैयारियों में जुटा हो, जिसमें करोड़ों श्रद्धालुओं की भागीदारी होनी है, तब सुरक्षा, समन्वय और व्यवस्थाओं की मजबूती सर्वोच्च प्राथमिकता बन जाती है। ऐसे में मुख्यमंत्री और उप सेना प्रमुख के बीच हुई यह मुलाकात प्रशासनिक और रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
हरिद्वार कुंभ-2027 को लेकर संत समाज, श्रद्धालुओं, व्यापारिक वर्ग और स्थानीय नागरिकों में भी खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। इस महाआयोजन से जहां उत्तराखंड की धार्मिक पहचान, आध्यात्मिक गरिमा और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलेगी, वहीं पर्यटन, स्थानीय व्यापार, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। कुल मिलाकर, धाकड़ धामी के नेतृत्व में हरिद्वार कुंभ-2027 न केवल आस्था का महापर्व होगा, बल्कि यह उत्तराखंड की आध्यात्मिक शक्ति, सांस्कृतिक वैभव, सुरक्षा व्यवस्थाओं और आधुनिक प्रशासनिक क्षमता का भी भव्य प्रदर्शन साबित होगा।
देवभूमि की दिव्यता, माँ चण्डिका देवी मंदिर की आस्था और धामी सरकार की तैयारियों के साथ हरिद्वार कुंभ-2027 निश्चित ही इतिहास रचने जा रहा है।








