अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉
गौला गेट इंचार्ज पिटाई कांड के बाद कोतवाली बनी पंचायत, 100 से ज्यादा लोग पहुंचे… आखिर क्यों हुआ समझौता?
देवरामपुर गेट विवाद ने पकड़ा तूल, तहरीर पर कार्रवाई से पहले दोनों पक्षों में बैठी सुलह
लालकुआं। गौला निकासी गेट देवरामपुर में गेट इंचार्ज और एक खनन व्यवसाई के बीच हुई मारपीट का मामला शुक्रवार को अचानक तूल पकड़ गया, जब घटना के बाद गेट इंचार्ज द्वारा लालकुआं कोतवाली में तहरीर दिए जाने पर क्षेत्र में हलचल मच गई। पुलिस कार्रवाई आगे बढ़ती, उससे पहले ही 100 से अधिक क्षेत्रवासी, खनन व्यवसाई और जनप्रतिनिधि कोतवाली पहुंच गए और मामला सुलझाने की कवायद शुरू हो गई। कई दौर की बातचीत के बाद आखिरकार दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया।
घटना ने सिर्फ गेट पर व्यवस्था और अनुशासन पर सवाल नहीं उठाए, बल्कि यह भी साफ कर दिया कि खनन क्षेत्र में तनातनी अब सीधे टकराव में बदलने लगी है। यही वजह रही कि मामूली विवाद समझे जा रहे इस मामले ने कुछ ही घंटों में कोतवाली को समझौता स्थल में बदल दिया।
क्या था मामला?
जानकारी के अनुसार गौला निकासी गेट देवरामपुर में किसी बात को लेकर खनन व्यवसाई और गेट इंचार्ज के बीच कहासुनी हो गई, जो देखते ही देखते मारपीट तक पहुंच गई। मामला बढ़ने पर गेट इंचार्ज ने लालकुआं कोतवाली पहुंचकर तहरीर दे दी। तहरीर के बाद क्षेत्र में यह चर्चा तेज हो गई कि यदि पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया तो इसका असर खनन गतिविधियों, स्थानीय कारोबार और आपसी माहौल पर पड़ सकता है।
फिर कोतवाली में क्यों जुटी भीड़?
यही वह सवाल है जिसने पूरे घटनाक्रम को और ज्यादा चर्चित बना दिया। दरअसल, खनन क्षेत्र से जुड़े लोगों को आशंका थी कि यदि मामला कानूनी कार्रवाई तक पहुंचा तो इसका असर पूरे गेट संचालन और स्थानीय खनन कारोबार पर पड़ सकता है। इसी वजह से बड़ी संख्या में लोग मध्यस्थता और समझौते के लिए कोतवाली पहुंच गए।
मामले को शांत कराने के लिए नगर पंचायत अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह लोटनी, देवरामपुर गेट अध्यक्ष भगवान सिंह धामी, व्यापार मंडल अध्यक्ष दीवान सिंह बिष्ट समेत कई स्थानीय लोग और खनन व्यवसाई सक्रिय हो गए। शुरुआत में बातचीत का पहला दौर बेनतीजा रहा, जिससे मामला और उलझता नजर आया। लेकिन इसके बाद फिर से लगातार मान-मनौव्वल और बातचीत का दौर चला।
व्यापारी नेताओं ने भी संभाला मोर्चा
मामले को शांत कराने के लिए व्यापारी नेता भुवन पांडे, नरेश चौधरी, दिनेश लोहानी समेत बड़ी संख्या में खनन व्यवसाई और स्थानीय लोग भी आगे आए। उन्होंने नाराज गेट इंचार्ज को मनाने और दोनों पक्षों के बीच दूरी कम करने का प्रयास किया। लंबी बातचीत और समझाइश के बाद आखिरकार दोनों पक्षों ने विवाद खत्म करने पर सहमति जता दी।
आखिर क्यों हुआ समझौता?
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा सवाल यही रहा कि तहरीर देने के बाद भी मामला कानूनी कार्रवाई तक क्यों नहीं पहुंचा? स्थानीय स्तर पर इसे खनन क्षेत्र की आपसी निर्भरता, कारोबार प्रभावित होने की आशंका, सामाजिक दबाव और माहौल बिगड़ने के डर से जोड़कर देखा जा रहा है। यही कारण रहा कि मामला कानूनी लड़ाई बनने से पहले सामाजिक समझौते में बदल गया।
हालांकि, यह घटना एक बड़ा संकेत भी दे गई है कि खनन गेटों पर बढ़ता तनाव कभी भी बड़े विवाद का रूप ले सकता है, यदि समय रहते प्रबंधन, अनुशासन और संवाद व्यवस्था को मजबूत नहीं किया गया।
वीडियो के बाद और गरमाया मामला
घटना से जुड़ा वीडियो सामने आने के बाद मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया। वीडियो ने स्थानीय स्तर पर गेट व्यवस्था, व्यवहार और खनन संचालन से जुड़े कई सवाल खड़े कर दिए। फिलहाल मामला भले ही समझौते से शांत हो गया हो, लेकिन देवरामपुर गेट पर हुआ यह विवाद पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
गौला गेट पिटाई कांड: कोतवाली में जुटी भीड़, फिर हुआ समझौता
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