अजय अनेजा 👉 संपादक उत्तराखंड जागरण 👉 उत्तराखंड के नैनीताल जनपद से राज्य की न्यायिक और राजनीतिक गतिविधियों से जुड़ा एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। देहरादून और हरिद्वार जनपदों में दर्ज अभियोगों के बाद लगातार नोटिस जारी होने से कानूनी दबाव झेल रहे ज्वालापुर के पूर्व विधायक सुरेश राठौर को नैनीताल स्थित उत्तराखंड उच्च न्यायालय से अंतरिम राहत मिली है। न्यायालय ने उनके विरुद्ध दर्ज चार अभियोगों में से दो मामलों में गिरफ्तारी पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। यह आदेश इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि मामला अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़ा है और प्रदेश स्तर पर इसका सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव पड़ा है।उच्च न्यायालय की एकलपीठ का आदेश
दो अभियोगों में गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक उत्तराखंड उच्च न्यायालय की एकलपीठ ने सुनवाई के बाद पूर्व विधायक सुरेश राठौर को राहत देते हुए उनके विरुद्ध दर्ज चार अभियोगों में से दो में गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी। न्यायालय के अनुसार इन दो अभियोगों में प्रथम दृष्टया कोई विशेष या ठोस आरोप स्पष्ट नहीं हो रहे हैं। इस आदेश के बाद सुरेश राठौर को फिलहाल गिरफ्तारी से राहत मिल गयी है और अगली सुनवाई तक पुलिस कोई दमनात्मक कार्रवाई नहीं कर सकेगी।किन जनपदों में दर्ज हैं अभियोग

चार थानों में हुई थी शिकायत
सुरेश राठौर के विरुद्ध हरिद्वार जनपद के बहादराबाद और झबरेड़ा थानों के साथ-साथ देहरादून जनपद के नेहरू कालोनी और डालनवाला कोतवाली में अभियोग दर्ज किए गये थे। इन अभियोगों के बाद पुलिस की ओर से लगातार नोटिस जारी किए जा रहे थे, जिसके चलते उन्होंने गिरफ्तारी से बचने के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।ऑडियो-वीडियो को लेकर क्या है विवाद
फर्जी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से तैयार होने का दावा
याचिका में सुरेश राठौर की ओर से यह दावा किया गया कि सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जा रहे ऑडियो और वीडियो फर्जी हैं और उन्हें कृत्रिम बुद्धिमत्ता तकनीक से तैयार किया गया है। यह पूरा मामला अंकिता भंडारी हत्याकांड से जोड़ा जा रहा है। अभिनेत्री उर्मिला सनावर द्वारा कुछ ऑडियो और वीडियो सार्वजनिक किए जाने के बाद विवाद गहराया, जिनमें सुरेश राठौर का नाम सामने आने की बात कही गयी। राठौर की ओर से आरोप लगाया गया कि इन सामग्रियों के माध्यम से उनकी और भाजपा नेताओं की छवि धूमिल करने का प्रयास किया गया।न्यायालय ने किन-किन को भेजा नोटिस
कई पक्षों से मांगा गया जवाब
उच्च न्यायालय ने इस मामले में सुरेश राठौर के साथ-साथ भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री दुष्यंत कुमार गौतम और आरती गौड़ को भी नोटिस जारी किया है। इसके अतिरिक्त संचित कुमार और धर्मेंद्र कुमार को भी न्यायालय ने नोटिस भेजकर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई में न्यायालय सभी पक्षों की दलीलों को सुनकर आगे का निर्णय लेगा।अधिवक्ता की प्रतिक्रिया और आगे की राह
अगली सुनवाई पर टिकी निगाहें
सुरेश राठौर के अधिवक्ता वैभव सिंह चौहान ने कहा कि न्यायालय का यह आदेश न्यायसंगत है और उनके मुवक्किल को बड़ी राहत देने वाला है। उन्होंने बताया कि न्यायालय ने तथ्यों के आधार पर यह माना कि दो अभियोगों में तत्काल गिरफ्तारी की आवश्यकता नहीं है। अब अगली सुनवाई में यह तय होगा कि शेष मामलों में क्या रुख अपनाया जाता है और जांच किस दिशा में आगे बढ़ेगी।यह मामला न केवल कानूनी बल्कि सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से भी संवेदनशील है। ऐसे में उच्च न्यायालय का अंतिम निर्णय प्रदेश की राजनीति और न्यायिक प्रक्रिया दोनों पर प्रभाव डाल सकता है।







