अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉 लालकुआं 👉 हल्दुचौड़ं 👉 बिन्दुखत्ता 👉 सूत्र
पत्रकारिता के नाम पर ‘नशे- ब्लैकमेल’ का खेल? लालकुआं-बिन्दुखत्ता में फर्जी पत्रकारों पर उठे सवाल
लालकुआं से बिन्दुखत्ता तक ‘फर्जी पत्रकारों’ का जाल? नशा, ब्लैकमेल और दबाव के आरोप
पत्रकारिता की आड़ में काला खेल! नशे और ब्लैकमेलिंग के आरोपों से क्षेत्र में हड़कंप
दिन में पत्रकार, रात में दबंगई? लालकुआं-हल्दुचौड़-बिन्दुखत्ता में उठे गंभीर सवाल
‘शराब-कबाब’ के लिए फोन, ब्लैकमेल और दबाव! कथित फर्जी पत्रकारों पर जांच की मांग
पत्रकारिता बदनाम करने वालों पर कब होगी कार्रवाई? क्षेत्र में कथित फर्जी चेहरों की चर्चा तेज
सूत्रों से पता चला है पुलिस को भी पत्रकारिता के नाम पर धमकाने बाज नहीं आते अंगूठाटेक तथाकथित पत्रकार
सूत्रों से पता चला है के क्षेत्र में सट्टेबाजी जैसे कारोबार में भी लिप्त है तथाकथित फर्जी पत्रकार प्रशासन ध्यान दे संज्ञान ले
लालकुआं/हल्दुचौड़/बिन्दुखत्ता।
लालकुआं, हल्दुचौड़ और बिन्दुखत्ता क्षेत्र में इन दिनों पत्रकारिता की आड़ में कथित तौर पर सक्रिय कुछ संदिग्ध लोगों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। स्थानीय स्तर पर यह आरोप उभरकर सामने आ रहे हैं कि कुछ लोग किसी चैनल, पोर्टल, अखबार या पत्रकार यूनियन का नाम जोड़कर खुद को पत्रकार बताने का प्रयास कर रहे हैं और इसी पहचान का इस्तेमाल कर दबाव, ब्लैकमेलिंग और प्रभाव जमाने का काम कर रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, क्षेत्र में कुछ ऐसे लोगों की गतिविधियों को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, जो दिन ढलते ही नशे, शराबखोरी और संदिग्ध मेलजोल को लेकर चर्चा में रहते हैं। आरोप यह भी हैं कि इनमें से कुछ लोग पीपल मंदिर के आसपास खुलेआम बैठकर नशा करने जैसी हरकतों से क्षेत्र का माहौल खराब कर रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है, लेकिन स्थानीय लोगों में इसे लेकर भारी नाराजगी देखी जा रही है।
चर्चा यह भी है कि ऐसे कुछ तथाकथित लोग पत्रकार यूनियनों या छोटे-मोटे मीडिया प्लेटफॉर्म से जुड़कर अपने लिए ‘कवच’ तैयार कर लेते हैं, ताकि उन पर आसानी से कार्रवाई न हो सके। यही नहीं, क्षेत्र में यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ लोग शराब-कबाब और अन्य निजी स्वार्थों के लिए फोन कर दबाव बनाने का काम करते हैं और आम लोगों, कारोबारियों व संस्थानों को पत्रकारिता का भय दिखाकर प्रभावित करने की कोशिश करते हैं।
मामले को और गंभीर बनाती है वह चर्चा, जिसमें कहा जा रहा है कि इनमें से एक कथित फर्जी पत्रकार को क्षेत्र के ही एक बड़े संस्थान ने भ्रामक खबरें चलाने के आरोप में 50 लाख रुपये का मानहानि नोटिस भी भेजा है। यदि यह तथ्य जांच में सही पाया जाता है, तो यह न सिर्फ पत्रकारिता की साख पर धब्बा है, बल्कि समाज और मीडिया दोनों के लिए चिंता का विषय है।
इधर, क्षेत्र में पेट्रोल-डीजल टैंकरों से तेल निकाले जाने जैसी गतिविधियों को लेकर भी कानाफूसी तेज है। स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर इन संदिग्ध गतिविधियों के पीछे कौन लोग हैं और क्या इनके तार उन तथाकथित लोगों से जुड़े हैं, जो पत्रकारिता का चोला ओढ़कर घूम रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों और जागरूक लोगों ने सूचना विभाग, पुलिस प्रशासन और संबंधित जांच एजेंसियों से मांग की है कि ऐसे सभी संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान, सत्यापन और गतिविधियों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही यह भी मांग उठ रही है कि वास्तविक पत्रकारों की गरिमा बचाने के लिए फर्जी पहचान का इस्तेमाल करने वालों पर सख्त कार्रवाई हो।
उत्तराखंड जागरण भी आमजन से अपील करता है कि यदि कोई व्यक्ति खुद को पत्रकार बताकर अनुचित दबाव, धन उगाही, धमकी या ब्लैकमेलिंग का प्रयास करे, तो उसकी सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस और प्रशासन को दें।
पत्रकारिता सेवा का माध्यम है, भय और ब्लैकमेल का हथियार नहीं।







