अजय अनेजा 👉 संपादक उत्तराखंड जागरण 👉 लालकुआं 👉
“सेंचुरी मिल धरना बना सियासी रण, महिलाओं ने किया जोरदार विरोध”
लालकुआं।
सेंचुरी पल्प एंड पेपर्स मिल से निकलने वाले नाले को लेकर प्रदूषण फैलने के आरोपों के बीच मंगलवार को लालकुआं तहसील परिसर में उस वक्त माहौल गर्मा गया, जब धरना शुरू होते ही नगर की दर्जनों महिलाएं जुलूस के रूप में मौके पर पहुंच गईं और प्रदर्शनकारियों का खुलकर विरोध करने लगीं।
महिलाओं ने “नेतागिरी बंद करो” और “नेतागिरी नहीं चलेगी” जैसे नारों के साथ तहसील परिसर के चारों ओर जुलूस निकालते हुए आरोप लगाया कि कुछ लोग प्रदूषण के नाम पर राजनीति कर रहे हैं और गरीबों की रोजी-रोटी पर संकट खड़ा कर रहे हैं। महिलाओं का कहना था कि सेंचुरी मिल से उन्हें प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलता है, जिससे उनके परिवारों का भरण-पोषण होता है।
महिलाओं ने चेताया कि इस तरह के धरना-प्रदर्शन से मिल का काम प्रभावित होता है, जिसका सीधा असर सैकड़ों गरीब परिवारों की आजीविका पर पड़ता है। उन्होंने ऐसे आंदोलनों को तुरंत बंद कराने की मांग की। इस दौरान धरनारत युवाओं और महिलाओं के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। महिलाओं ने साफ कहा कि यदि धरना समाप्त नहीं हुआ तो वे स्वयं बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करेंगी।
वहीं, नाले के प्रदूषण के आरोपों पर सेंचुरी मिल प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि मिल में प्रदूषण नियंत्रण के लिए सभी आवश्यक उपकरण लगाए गए हैं और निर्धारित मानकों का पूरी तरह पालन किया जा रहा है।
पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर लालकुआं में उद्योग, रोजगार और प्रदूषण के मुद्दे को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।







