अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉 लालकुआं 👉 बिन्दुखत्ता 👉 राजस्व ग्राम की मांग पर खुरियाखत्ता में फूटा जनआक्रोश, हजारों ग्रामीणों ने निकाली पदयात्रा
‘बिंदुखत्ता मांगे राजस्व ग्राम’ के नारों से गूंजा क्षेत्र, मशाल गीत ने भरा जोश; सरकार से पूछा—जब 1700 से ज्यादा गांवों को मिला दर्जा तो बिंदुखत्ता क्यों अटका?
बिंदुखत्ता, 01 सितंबर 2026। बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर 15 अगस्त से शुरू हुई पदयात्रा मंगलवार को खुरियाखत्ता पहुंची, जहां हजारों ग्रामीणों की भीड़ ने आंदोलन को जनसैलाब में बदल दिया। खुरियाखत्ता नंबर 9 एवं 10 से होते हुए पदयात्रा टूटी पुलिया चौराहे पर पहुंची। यहां नुक्कड़ सभाओं और जनसभा के बाद आज की पदयात्रा का समापन किया गया। बुधवार को पदयात्रा शीशमभुजिया क्षेत्र के लिए रवाना होगी।
पदयात्रा में ग्रामीणों को ‘बिंदुखत्ता मांगे राजस्व ग्राम’ लिखी टी-शर्ट वितरित की गई। इस दौरान वन अधिकार संगठन के कविराज धामी ने प्रसिद्ध जनगीत ‘ले मशालें चल पड़े हैं, लोग मेरे गांव के’ गाकर पदयात्रियों में नया जोश भर दिया। गीत के बीच ग्रामीणों ने जोरदार नारेबाजी करते हुए राजस्व ग्राम की मांग को लेकर अपना समर्थन जताया।
FRA को लेकर सरकार पर उठाए सवाल
नुक्कड़ सभाओं के दौरान ग्रामीणों को वनाधिकार कानून (FRA) की जानकारी दी गई। वनाधिकार संगठन की महिला उपाध्यक्ष ममता बिष्ट ने कहा कि FRA के तहत तीन पीढ़ियों अथवा 75 वर्ष तक एक ही स्थान पर रहना हर मामले में कोई सार्वभौमिक अनिवार्यता नहीं है। उन्होंने कहा कि बिंदुखत्ता वर्ष 1932 से चली आ रही बसासत और पीढ़ियों से वनाश्रित जीवन के पर्याप्त आधार प्रस्तुत कर चुका है। ऐसे में मामले को केवल ‘संस्तुति’ जैसे शब्दों में उलझाने के बजाय कानून के अनुरूप निर्णय लिया जाना चाहिए।
संगठन के उपाध्यक्ष दीपक जोशी ने कहा कि FRA के तहत राजस्व ग्राम की प्रक्रिया को वन भूमि के अनारक्षण, भूमि के बदले भूमि, प्रतिपूरक वनीकरण अथवा केंद्र सरकार या सुप्रीम कोर्ट की अनुमति जैसी शर्तों के नाम पर रोकना अधिनियम की मूल भावना के विपरीत है।
‘दूसरे गांवों को दर्जा तो बिंदुखत्ता क्यों नहीं?’
पदयात्रा के दौरान ग्रामीणों ने सरकार से सीधा सवाल किया कि जब देश में FRA के तहत 1,700 से अधिक राजस्व ग्राम बनाए जा चुके हैं और उत्तर प्रदेश में 54 तथा उत्तराखंड में 6 राजस्व ग्राम बनाए गए हैं, तो बिंदुखत्ता को अब तक राजस्व ग्राम का दर्जा क्यों नहीं दिया गया? ग्रामीणों ने सरकार से लंबित मांग पर जल्द निर्णय लेने की मांग दोहराई।
इन लोगों की रही प्रमुख भागीदारी
आज की पदयात्रा में अध्यक्ष उमेश भट्ट, अर्जुन नाथ, बलवंत बिष्ट, ममता बिष्ट, कविराज धामी, भरत नेगी, दीपक जोशी, सोहनलाल, सुशील यादव, दीपक नेगी, सूबेदार प्रेम सिंह, मंगल सिंह कोश्यारी, वीरेंद्र कार्की, भाजपा किसान मोर्चा के गोविंद दानू, भाजपा मंडल उपाध्यक्ष कविंद्र कोरंगा, लाल सिंह कोरंगा, करम सिंह कोरंगा, रमेश गोस्वामी, दौलत सिंह कोरंगा, नवीन जोशी, रज्जी बिष्ट, जे.सी. उप्रेती, गोविन्द चौहान, गौरव कोरंग, सुन्दर सिंह कोरंगा, बलवन्त सिंह कोरंगा, रमेश कोरंगा, योगेश कोरंगा, मंजू देवी, गंगा देवी, पार्वती देवी, दीपा देवी और कौशल्या देवी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल रहे।
पदयात्रा के बढ़ते जनसमर्थन ने साफ संकेत दिया है कि बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा देने की मांग अब केवल संगठन तक सीमित नहीं रही, बल्कि गांव-गांव से उठती आवाज के रूप में लगातार मजबूत हो रही है।

