खूनी गुलदार का आतंक: जंगल गई महिला को बनाया निवाला, वन विभाग पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा

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अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉
खूनी गुलदार का आतंक: जंगल गई महिला को बनाया निवाला, वन विभाग पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा
भीमताल-धारी-ओखलकांडा क्षेत्र में दहशत, दिसंबर से अब तक 4 महिलाएं गंवा चुकी हैं जान
उत्तराखंड जागरण | संवाददाता
नैनीताल/भीमताल। कुमाऊं के पर्वतीय क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष लगातार भयावह होता जा रहा है। ताजा और दर्दनाक घटना में भीमताल क्षेत्र में जंगल घास लेने गई एक महिला को गुलदार ने अपना शिकार बना लिया। इस हृदयविदारक घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत, आक्रोश और भय का माहौल है। ग्रामीणों ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए तत्काल सख्त कार्रवाई की मांग की है।
जानकारी के अनुसार, महिला दोपहर के समय अपने मवेशियों के लिए घास लेने जंगल गई थी, लेकिन देर शाम तक घर वापस नहीं लौटी। परिजनों ने पहले आसपास खोजबीन की, लेकिन जब कोई सुराग नहीं मिला तो इसकी सूचना स्थानीय प्रशासन और वन विभाग को दी गई। सूचना मिलते ही वन विभाग और स्थानीय पुलिस की टीम ने संयुक्त रूप से सर्च अभियान चलाया। देर रात जंगल के भीतर महिला का क्षत-विक्षत शव बरामद किया गया, जिसे देखकर पूरे गांव में कोहराम मच गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि गांव के आसपास लंबे समय से गुलदार की सक्रियता बनी हुई है। ग्रामीणों ने कई बार वन विभाग से पिंजरा लगाने, गश्त बढ़ाने और सुरक्षा इंतजाम मजबूत करने की मांग की, लेकिन शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया। लोगों का आरोप है कि अगर समय रहते विभाग सतर्क होता, तो शायद एक और जान बचाई जा सकती थी।
ग्रामीणों ने बताया कि भीमताल, धारी और ओखलकांडा क्षेत्र बीते दिसंबर माह से लगातार गुलदार के खौफ में जी रहे हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि अब तक इन इलाकों में 4 महिलाएं गुलदार के हमले में अपनी जान गंवा चुकी हैं। हालांकि वन विभाग द्वारा अब तक 6 गुलदारों को पकड़कर रेस्क्यू सेंटर भेजा जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद क्षेत्र में खतरा कम होता नजर नहीं आ रहा।
मामले में डीएफओ आकाश गंगवार ने बताया कि जंगल से महिला का शव बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। गांव में तत्काल पिंजरा लगाया जा रहा है और हमलावर गुलदार की पहचान के लिए डीएनए सैंपल भी लिए जा रहे हैं। प्रशासन ने घटना की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय लोगों से सतर्क रहने और अकेले जंगल की ओर न जाने की अपील की है।
घटना के बाद ग्रामीणों में वन विभाग के खिलाफ भारी आक्रोश है। लोगों ने प्रभावित परिवार को उचित मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को सरकारी सहायता/रोजगार, और क्षेत्र में स्थायी सुरक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग की है। साथ ही, ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
इधर, इसी कड़ी में कालाढूंगी बंदोबस्ती क्षेत्र से भी एक और दर्दनाक मामला सामने आया है, जहां 68 वर्षीय किसान भूपेंद्र सिंह बिष्ट की वन्यजीव के हमले में मौत हो गई। हमले में उनके कूल्हे की हड्डी टूट गई और शरीर के ऊपरी हिस्से की मांसपेशियां बुरी तरह क्षत-विक्षत हो गईं। परिजनों ने क्षेत्र में हाथियों की बढ़ती सक्रियता को देखते हुए हाथी के हमले की आशंका जताई है, हालांकि वन विभाग इस मामले में यह भी जांच कर रहा है कि हमला हाथी ने किया या किसी बारहसिंगा जैसे वन्यजीव ने।
एक के बाद एक हो रही इन घटनाओं ने साफ कर दिया है कि पहाड़ में इंसान और वन्यजीवों के बीच टकराव अब जानलेवा मोड़ पर पहुंच चुका है। सवाल यह है कि आखिर कब जागेगा वन विभाग, और कब ग्रामीणों को इस खूनी आतंक से राहत मिलेगी?

 

 

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