अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉 रुद्रपुर 👉 काशीपुर 👉 लालकुआं 👉 हल्दुचौड़ं 👉 बिन्दुखत्ता 👉 कुमाऊं 👉 हल्द्वानी 👉 नैनीताल 👉
सघन अभियान का दावा, ज़मीनी हकीकत ढीली—“गहरी नींद” में आबकारी विभाग?
महेशपुरा चेक पोस्ट पर चेकिंग, लेकिन लालकुआं से बाजपुर तक अवैध शराब की खुली बिक्री के आरोप
शनिवार, 25 अप्रैल 2026 को विशेष सघन प्रवर्तन अभियान के तहत आबकारी विभाग ने अवैध मादक द्रव्यों के निर्माण, बिक्री व भंडारण पर रोक लगाने के उद्देश्य से महेशपुरा चेक पोस्ट पर व्यापक चेकिंग अभियान चलाया। यह कार्रवाई माननीय आबकारी आयुक्त के निर्देश पर जनपदीय प्रवर्तन दल और क्षेत्र-04 बाजपुर की संयुक्त टीम द्वारा की गई।
अभियान में आबकारी निरीक्षक महेंद्र सिंह बिष्ट के नेतृत्व में उप आबकारी निरीक्षक देवेन्द्र कुमार, प्रधान आबकारी सिपाही पवन कुमार कम्बोज तथा सिपाही राखी, रेनुका बोरा, वंदना घिल्डियाल और अर्चना यादव शामिल रहे। टीम ने संदिग्ध वाहनों की तलाशी लेकर अवैध शराब के परिवहन को रोकने की कोशिश की।
आबकारी विभाग का दावा है कि जिले में अवैध शराब के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है और इस पर सख्ती से लगाम कसी जा रही है।
लेकिन सवाल वहीं खड़ा है…
स्थानीय सूत्रों और क्षेत्रीय लोगों का आरोप है कि लालकुआं, नैनीताल, उधम सिंह नगर, बाजपुर, हल्दूचौड़ और बिंदुखत्ता जैसे क्षेत्रों में अवैध शराब खुलेआम बिक रही है। कई जगहों पर यह धंधा इतने खुले रूप में संचालित हो रहा है कि मानो किसी का डर ही नहीं है।
सूत्रों के मुताबिक,
👉 कुछ स्थानों पर कार्रवाई केवल “खानापूर्ति” बनकर रह गई है।
👉 छोटी-मोटी बरामदगी दिखाकर बड़े नेटवर्क पर पर्दा डाला जा रहा है।
👉 विभाग की निष्क्रियता या मिलीभगत को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय लोगों का गुस्सा:
क्षेत्रवासियों का कहना है कि अवैध शराब से न सिर्फ युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है, बल्कि कई बार जहरीली शराब से जान जाने का खतरा भी बना रहता है। इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
क्या कहते हैं हालात?
एक ओर चेक पोस्टों पर सघन चेकिंग के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अंदरूनी इलाकों में अवैध शराब की बिक्री यह दर्शाती है कि कार्रवाई की जमीनी पकड़ कमजोर है।
महेशपुरा चेक पोस्ट पर चला अभियान कागज़ों में भले सख्त दिखाई दे, लेकिन यदि क्षेत्र में खुलेआम अवैध शराब बिक रही है, तो यह साफ संकेत है कि कहीं न कहीं आबकारी विभाग “गहरी नींद” में है या फिर कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई है।
अब देखना यह होगा कि विभाग इन आरोपों पर क्या ठोस कदम उठाता है या फिर अभियान सिर्फ कागज़ी ही साबित होता है।







