अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉 मिशन-2027 पर भाजपा का बड़ा मंथन, 55 सीटों के दावे ने बढ़ाई सियासी गर्मी; जीतने वालों को ही मिलेगा टिकट!
विधायकों के रिपोर्ट कार्ड पर नजर, कमजोर प्रदर्शन करने वालों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें—प्रदेश कार्यसमिति में बनेगा चुनावी रोडमैप
हल्द्वानी। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी तैयारियों को धार देना शुरू कर दिया है। प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में विधायकों के रिपोर्ट कार्ड की समीक्षा के साथ ही मिशन-2027 के लिए पार्टी की चुनावी रणनीति पर मंथन होने की संभावना है। पार्टी का लक्ष्य सत्ता में दोबारा वापसी का है और इसी को ध्यान में रखते हुए संगठन स्तर पर तैयारियों को तेज किया जा रहा है।
भाजपा ने भले ही सीधे तौर पर कमजोर प्रदर्शन करने वाले विधायकों को टिकट न देने अथवा बदलने की बात से इनकार किया हो, लेकिन प्रदेश नेतृत्व का स्पष्ट संदेश है कि टिकट उसी को मिलेगा जिसके जीतने की संभावना सबसे मजबूत होगी। ऐसे में विधायकों के क्षेत्र में प्रदर्शन, जनता के बीच पकड़, संगठन से तालमेल और चुनावी स्थिति जैसे पहलुओं को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
55 सीटों के दावे ने बढ़ाई सियासी हलचल
कुमाऊं संभाग कार्यालय में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने पार्टी की चुनावी स्थिति को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने बताया कि करीब तीन महीने पहले कराए गए सर्वे में भाजपा को 55 विधानसभा सीटों पर जीत की स्थिति में बताया गया था। इस दावे के बाद मिशन-2027 को लेकर पार्टी के भीतर उत्साह बढ़ा है, वहीं राजनीतिक गलियारों में भी इसकी चर्चा तेज हो गई है।
प्रदेश अध्यक्ष के बयान से साफ संकेत मिल रहे हैं कि भाजपा आगामी चुनाव में जीत की संभावनाओं को लेकर आंतरिक स्तर पर लगातार आंकलन कर रही है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में विधानसभा क्षेत्रवार फीडबैक और सर्वे रिपोर्ट के आधार पर उम्मीदवारों को लेकर तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
कमजोर विधायकों पर नजर, जीत का फार्मूला होगा निर्णायक
भाजपा नेतृत्व लगातार यह संदेश दे रहा है कि संगठन में सक्रियता और चुनाव जीतने की क्षमता को प्राथमिकता दी जाएगी। ऐसे में मौजूदा विधायकों के लिए आगामी समय बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जिन क्षेत्रों में पार्टी का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा है, वहां संगठन और जनप्रतिनिधियों की सक्रियता पर विशेष नजर रखी जा सकती है।
हालांकि पार्टी अभी से टिकट काटने या विधायकों को बदलने की किसी औपचारिक रणनीति से इनकार कर रही है, लेकिन ‘जीतने वाले को टिकट’ का फार्मूला कई मौजूदा विधायकों की चिंता बढ़ाने वाला जरूर है।
बाहर से आने वालों के लिए भाजपा के दरवाजे खुले
दूसरी ओर दूसरे दलों से नेताओं के भाजपा में आने की संभावनाओं को लेकर भी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने पार्टी की स्थिति स्पष्ट की है। उनका कहना है कि पार्टी के दरवाजे हमेशा खुले हैं। इससे संकेत मिल रहे हैं कि मिशन-2027 से पहले भाजपा चुनावी समीकरणों के लिहाज से दूसरे दलों के प्रभावशाली नेताओं को भी अपने साथ जोड़ने की रणनीति पर आगे बढ़ सकती है।
प्रदेश प्रभारी और संगठन मंत्री की गैरमौजूदगी बनी चर्चा का विषय
प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में इस बार प्रदेश प्रभारी और प्रदेश महामंत्री संगठन की अनुपस्थिति भी राजनीतिक चर्चा का विषय बनी हुई है। भाजपा की प्रदेश स्तरीय बैठकों में इन दोनों पदों की अहम भूमिका रहती है, लेकिन नए पदाधिकारियों की प्रदेश कार्यसमिति की पहली बैठक में दोनों की गैरमौजूदगी ने सवाल खड़े कर दिए हैं।
कुछ समय पहले प्रदेश में हुए विवाद में प्रदेश प्रभारी का नाम सामने आया था। इसके बाद से उनकी प्रदेश की बैठकों में सक्रिय मौजूदगी दिखाई नहीं दे रही है। वहीं प्रदेश महामंत्री संगठन के पद पर अभी नियुक्ति नहीं हो सकी है।
ऐसे में मिशन-2027 की तैयारियों के बीच संगठन के दो अहम पदों की स्थिति भी भाजपा के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा बनी हुई है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि प्रदेश कार्यसमिति की बैठक से भाजपा कौन-सा चुनावी रोडमैप लेकर निकलती है और 55 सीटों के दावे को जमीन पर जीत में बदलने के लिए पार्टी किस रणनीति को आगे बढ़ाती है।

