अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉
ग्राफिक एरा हल्द्वानी में राज्य स्तरीय सेमिनार संपन्न, उत्तराखण्ड के आर्थिक रूपांतरण और युवाओं के भविष्य पर हुआ मंथन
हल्द्वानी, 9 अक्टूबर। ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी, हल्द्वानी परिसर में उत्तराखण्ड की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने और सतत विकास की संभावनाओं पर आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय सेमिनार का शुक्रवार को सफल समापन हो गया। 8 और 9 अक्टूबर को आयोजित इस सेमिनार में शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं, शोधार्थियों, उद्योग विशेषज्ञों और विद्यार्थियों ने राज्य के आर्थिक विकास, जल संरक्षण, ऊर्जा सुरक्षा, पर्यटन, रोजगार सृजन और युवाओं के पलायन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार साझा किए।

स्कूल ऑफ मैनेजमेंट एवं पीडीपी विभाग की ओर से ‘आरोही’ संस्था के सहयोग से आयोजित सेमिनार का विषय सतत अवसंरचना, ऊर्जा सुरक्षा, जल संसाधन प्रबंधन और समावेशी विकास के लिए युवा-नेतृत्व वाले नवाचार के माध्यम से उत्तराखण्ड की अर्थव्यवस्था का रूपांतरण रहा। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को सशक्त बनाने, प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और सतत उत्तराखण्ड के निर्माण की दिशा में व्यावहारिक रणनीतियां तैयार करना था।
उद्घाटन सत्र में ग्राफिक एरा हल्द्वानी के परिसर निदेशक डॉ. एम.सी. लोहानी ने आर्थिक प्रगति के साथ प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया। सेमिनार संयोजक प्रो. (डॉ.) बीना नारायण ने कार्यक्रम के उद्देश्यों और रूपरेखा की जानकारी दी। इस दौरान सेमिनार की स्मारिका का विमोचन भी किया गया।
मुख्य वक्ता उत्तराखण्ड सेतु आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष डॉ. राज शेखर जोशी ने कहा कि राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए भौतिक अवसंरचना के साथ सामाजिक अवसंरचना को भी प्राथमिकता देना आवश्यक है। उन्होंने ग्रामीण विकास, कौशल सुधार और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के महत्व को रेखांकित किया। विशिष्ट अतिथि उत्तराखण्ड काउंसिल फॉर बायोटेक्नोलॉजी के निदेशक प्रो. (डॉ.) संजय कुमार ने राज्य में विकसित हो रहे स्टार्टअप इकोसिस्टम का उल्लेख करते हुए स्थानीय युवाओं को अधिक अवसर उपलब्ध कराने पर बल दिया।
‘विजन उत्तराखण्ड 2047’ पर हुई विशेष चर्चा
सेमिनार में ‘विजन उत्तराखण्ड 2047’ के तहत प्रति व्यक्ति आय में असमानता दूर करने और युवाओं के पलायन को रोकने पर विशेष पैनल चर्चा आयोजित की गई। कुमाऊं विश्वविद्यालय के प्रो. अतुल कुमार जोशी के संचालन में हुई चर्चा में पर्यटन विभाग की अपर निदेशक पूनम चंद ने कम चर्चित पर्यटन स्थलों को बढ़ावा देने और कौशल प्रमाणन पाठ्यक्रमों की आवश्यकता बताई। उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय के प्रो. पी.डी. पंत ने नदियों के संरक्षण में स्थानीय संस्कृति और संसाधनों की भूमिका पर जोर दिया। वहीं, वाटरशेड प्रबंधन निदेशालय के डॉ. एस.के. उपाध्याय ने जल संरक्षण को आजीविका से जोड़ने, आईसीएआर-आईवीआरआई के डॉ. शेर सिंह ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए फसल कटाई के बाद बेहतर प्रबंधन तथा आरोही सोसाइटी के समिरन नारायण ने समावेशी और सुनियोजित पर्यटन को जरूरी बताया।
हाइब्रिड मोड में आयोजित इस सेमिनार में देशभर के शोधार्थियों ने शोध-पत्र प्रस्तुत किए। चार प्रमुख ट्रैक्स के अंतर्गत सतत अवसंरचना एवं जलवायु परिवर्तन, उद्यमिता एवं युवा सशक्तिकरण, विजन उत्तराखण्ड 2047 एवं निरंतरता तथा ऑनलाइन प्रस्तुतियों पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने हिमालयी पारिस्थितिकी के संरक्षण, ग्रीन इंजीनियरिंग, ऊर्जा सुरक्षा, इको-टूरिज्म और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने पर विचार रखे।
पोस्टर प्रतियोगिता में लक्ष्मी पंवार प्रथम
सेमिनार के अंतर्गत आयोजित पोस्टर-मेकिंग प्रतियोगिता में ग्राफिक एरा हल्द्वानी की बीएजेएमसी छात्रा लक्ष्मी पंवार ने प्रथम स्थान हासिल किया। एमआईईटी के शैलेंद्र कांडपाल द्वितीय रहे, जबकि एमआईईटी की वर्षा नैनवाल और ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी की शगुन जलहोत्रा ने संयुक्त रूप से तृतीय स्थान प्राप्त किया। परिणीत वर्मा को सांत्वना पुरस्कार दिया गया। समापन अवसर पर सह-संयोजक डॉ. आनंद जोशी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने आयोजन में सहयोग देने वाले अतिथियों, शोधार्थियों और स्वयंसेवकों का आभार व्यक्त किया।

