अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉
ओवरस्पीडिंग पर चालान बढ़े, हादसों पर लगाम फेल! उत्तराखंड में आठ महीने में 28% उछले सड़क हादसे
कार्रवाई तेज, फिर भी सड़कों पर मौत का तांडव; 1,480 दुर्घटनाएं दर्ज, क्रैश बैरियर और हॉट स्पॉट सुधारने का काम अधूरा
हल्द्वानी। उत्तराखंड में सड़क हादसों पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस और परिवहन विभाग की कार्रवाई के दावों के बीच दुर्घटनाओं का ग्राफ लगातार ऊपर चढ़ रहा है। ओवरस्पीडिंग के खिलाफ चालान की कार्रवाई बढ़ी, लेकिन तेज रफ्तार और सड़क सुरक्षा की खामियों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं लग पाया। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 में प्रदेश में 1,289 सड़क हादसे दर्ज किए गए थे, जबकि इस साल अगस्त तक ही दुर्घटनाओं की संख्या बढ़कर 1,480 पहुंच गई। हादसों में करीब 28.10 प्रतिशत वृद्धि ने सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आंकड़ों के अनुसार, हादसों में घायलों की संख्या भी 13.2 प्रतिशत बढ़ी है। वहीं सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वालों की संख्या 881 से बढ़कर 884 हो गई। सबसे चिंताजनक स्थिति चंपावत जिले की है, जहां दुर्घटनाओं में 117.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। बागेश्वर और अल्मोड़ा में भी हादसे 50 प्रतिशत बढ़े हैं। टिहरी में 41.9 प्रतिशत, पौड़ी में 37 प्रतिशत और चमोली में 36.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
चालान बढ़े, लेकिन रफ्तार पर ब्रेक नहीं
ओवरस्पीडिंग के खिलाफ कार्रवाई के आंकड़े भी सवाल खड़े कर रहे हैं। वर्ष 2025 में तेज रफ्तार के 19,355 मामलों में कार्रवाई हुई थी, जबकि 2026 में यह संख्या बढ़कर 29,214 हो गई। इसके बावजूद सड़क दुर्घटनाओं में कमी आने के बजाय बढ़ोतरी दर्ज की गई। ऊधमसिंह नगर में 295 से बढ़कर 356, नैनीताल में 200 से बढ़कर 220 और देहरादून में 303 से बढ़कर 315 हादसे दर्ज हुए। हरिद्वार में भी दुर्घटनाओं की संख्या 280 से बढ़कर 312 पहुंच गई।
हालांकि, रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ़ में हादसों में क्रमशः 19.2 और 14.8 प्रतिशत की कमी दर्ज होना राहत की बात है।
2,707 किलोमीटर सड़क पर क्रैश बैरियर का इंतजार
सड़क सुरक्षा के इंतजामों की स्थिति भी चिंताजनक है। प्रदेश में 15,122.85 किलोमीटर सड़क में से 8,422.78 किलोमीटर पर क्रैश बैरियर लगाने के लिए चिह्नित किया गया था। इनमें 5,714.96 किलोमीटर पर काम पूरा हुआ, जबकि 2,707.82 किलोमीटर सड़क पर काम अभी बाकी है। पहाड़ी मार्गों पर दुर्घटनाओं की गंभीरता को देखते हुए क्रैश बैरियर का अधूरा काम बड़ा जोखिम बना हुआ है।
419 संवेदनशील स्थान अब भी चुनौती
रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश में 2,559 संवेदनशील स्थान चिह्नित किए गए थे। इनमें से 2,140 स्थानों पर सुधार कार्य पूरा हुआ, लेकिन 419 स्थानों पर काम बाकी है। इसके अलावा चिह्नित 179 ब्लैक स्पॉट में से 10 का सुधार अभी किया जाना शेष है।
उप परिवहन आयुक्त शैलेश कुमार तिवारी के अनुसार, संबंधित विभागों को प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। बिना हेलमेट पेट्रोल देने पर पाबंदी जैसे नियम लागू करने की बात भी कही गई है। क्रैश बैरियर लगाने और सड़कों के गड्ढे ठीक करने का काम जल्द पूरा कराने की बात कही गई है।
सवाल यह है कि जब ओवरस्पीडिंग पर कार्रवाई बढ़ रही है, तो हादसों में कमी क्यों नहीं आ रही? सड़क सुरक्षा के लिए केवल चालान काटना पर्याप्त नहीं है। नियमों का सख्ती से पालन कराने के साथ संवेदनशील स्थानों पर सुधार और अधूरे सुरक्षा कार्यों को समय पर पूरा करना भी जरूरी है

