ग्राफिक एरा में डॉ. कविता पांडेय की साहित्यिक कृति ‘अदम्य-असीम की ओर’ को लेकर चर्चा, लखनऊ पुस्तक मेले में हुआ लोकार्पण

अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉 हल्द्वानी 👉

ग्राफिक एरा में डॉ. कविता पांडेय की साहित्यिक कृति ‘अदम्य-असीम की ओर’ को लेकर चर्चा, लखनऊ पुस्तक मेले में हुआ लोकार्पण

स्त्री-मन की संवेदनाओं, संघर्षों और स्वतंत्रता की आकांक्षा को स्वर देती है कहानी-संग्रह की कृति; ‘साहित्य शिरोमणि सम्मान’ से भी हुईं सम्मानित

हल्द्वानी। कुमाऊँ की साहित्यिक परंपरा को अपनी रचनात्मक दृष्टि से समृद्ध करने वाली लेखिका एवं शिक्षाविद् प्रोफेसर (डॉ.) कविता पांडेय की नवीनतम कहानी-संग्रह कृति ‘अदम्य-असीम की ओर’ स्त्री-अस्मिता, आत्मसम्मान और स्वतंत्रता की आकांक्षा को केंद्र में रखती है। लखनऊ में आयोजित राष्ट्रीय पुस्तक मेले में इस कृति का लोकार्पण हुआ। इस अवसर पर डॉ. कविता पांडेय को प्रतिष्ठित ‘साहित्य शिरोमणि सम्मान’ से भी सम्मानित किया गया।

डॉ. कविता पांडेय का साहित्य स्त्री-जीवन से जुड़े उन संवेदनशील पहलुओं की ओर ध्यान आकर्षित करता है, जो अक्सर सामाजिक रूढ़ियों, असमानताओं और पारिवारिक अपेक्षाओं के बीच दबकर रह जाते हैं। ‘अदम्य-असीम की ओर’ शीर्षक अपने भीतर संघर्षों से हार न मानने और संभावनाओं की सीमाओं को पार करने का संदेश समेटे हुए है। कृति की मूल संवेदना महिलाओं की सामाजिक स्थिति, उनके जीवन-संघर्ष, आत्मनिर्भरता और अपने निर्णय स्वयं लेने की आकांक्षा से जुड़ी है।

लेखिका की रचनात्मक दृष्टि का प्रमुख पक्ष मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक यथार्थ को समझने का प्रयास है। स्त्री को केवल त्याग, समर्पण और सहनशीलता की पारंपरिक परिभाषाओं में सीमित करने के बजाय उसकी स्वतंत्र पहचान, इच्छाओं और सपनों को महत्त्व देना इस विषय की केंद्रीय चिंता है। ऐसे में यह कृति स्त्री-अस्मिता और समानता जैसे प्रश्नों पर पाठकों को विचार करने का अवसर प्रदान करती है।

डॉ. कविता पांडेय साहित्यकार होने के साथ-साथ प्रतिष्ठित शिक्षाविद् और वैज्ञानिक भी रही हैं। उन्होंने कुमाऊँ विश्वविद्यालय, नैनीताल में भौतिक विज्ञान विभागाध्यक्ष, अधिष्ठाता विज्ञान संकाय तथा अधिष्ठाता छात्र कल्याण जैसे महत्त्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन किया है। विज्ञान की तार्किकता और साहित्य की संवेदनशीलता का संगम उनके व्यक्तित्व का उल्लेखनीय पक्ष है। शिक्षा और विज्ञान के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाने के साथ साहित्य के माध्यम से सामाजिक सरोकारों को अभिव्यक्त करना उनके बहुआयामी व्यक्तित्व को दर्शाता है।

कुमाऊँ की धरती हिंदी साहित्य को अनेक उल्लेखनीय महिला साहित्यकार दे चुकी है। गौरा पंत ‘शिवानी’ सहित कई रचनाकारों ने स्त्री-जीवन और मानवीय संबंधों को अपनी लेखनी से विशिष्ट पहचान दिलाई है। डॉ. कविता पांडेय भी इसी सृजनशील परंपरा से जुड़कर स्थानीय जीवनानुभवों को व्यापक सामाजिक और मानवीय संदर्भों से जोड़ने का प्रयास कर रही हैं। भीमताल से उनका संबंध उनकी क्षेत्रीय पहचान को भी रेखांकित करता है।

साहित्य की सार्थकता केवल पुरस्कारों और सम्मानों तक सीमित नहीं होती, बल्कि वह पाठकों के भीतर संवेदना जगाने, सामाजिक रूढ़ियों पर पुनर्विचार करने और मानवीय मूल्यों को मजबूत बनाने में भी निहित होती है। ‘साहित्य शिरोमणि सम्मान’ से सम्मानित होना डॉ. कविता पांडेय की साहित्यिक यात्रा का उल्लेखनीय पड़ाव है। उम्मीद है कि उनकी कृति ‘अदम्य-असीम की ओर’ पाठकों को महिलाओं के संघर्षों, स्वतंत्रता और समान अधिकारों के प्रश्नों पर गंभीरता से विचार करने के लिए प्रेरित करेगी।