अजय अनेजा 👉 संपादक उत्तराखंड जागरण 👉 देहरादून। उत्तराखंड की बेटी अंकिता भंडारी से जुड़े मामले को लेकर बीते पखवाड़े से प्रदेश में चल रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज स्वयं स्थिति स्पष्ट करने के लिए सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में पत्रकार वार्ता की। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस संवेदनशील प्रकरण में राज्य सरकार पूरी जिम्मेदारी और पारदर्शिता के साथ अपना पक्ष जनता के सामने रख रही है। मुख्यमंत्री धामी ने दो टूक कहा कि अंकिता भंडारी को न्याय दिलाना सरकार के लिए केवल एक दायित्व नहीं, बल्कि नैतिक संकल्प है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मामले में आगे उठाया जाने वाला कोई भी कदम पीड़ित माता-पिता की भावनाओं, पीड़ा और अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए ही तय किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह घटना सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड को भीतर तक झकझोर देने वाली त्रासदी थी। सरकार ने शुरू से यह सुनिश्चित किया कि जांच और न्यायिक प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर लापरवाही या दबाव की कोई गुंजाइश न रहे। इसी सोच के तहत महिला अधिकारी रेणुका देवी के नेतृत्व में विशेष जांच दल का गठन किया गया। जिसने तकनीकी, तथ्यात्मक और परिस्थिति जन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की गहन जांच की। मुख्यमंत्री ने बताया कि निष्पक्ष जांच और राज्य सरकार की प्रभावी कानूनी पैरवी के चलते न्यायालय ने तीनों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। उन्होंने कहा कि यह फैसला इस बात का प्रमाण है कि उत्तराखंड में अपराधी चाहे कोई भी हो, कानून से ऊपर नहीं है।







