बड़ीखबर 69 लाख की “डिजिटल अरेस्ट” ठगी का STF ने किया भंडाफोड़, लालकुआं कनेक्शन वाला आरोपी गिरफ्तार

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अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉
“डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर 69 लाख की ठगी, लालकुआं से जुड़ा आरोपी STF के हत्थे चढ़ा
सीनियर सिटिजन को पुलिस-कोर्ट बनकर डराया, फर्जी जमानत-पत्र और NOC के नाम पर ऐंठी मोटी रकम
देहरादून/लालकुआं। उत्तराखंड में साइबर अपराधियों के बढ़ते जाल के बीच उत्तराखंड एसटीएफ की साइबर क्राइम टीम ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर लाखों रुपये की ठगी करने वाले गिरोह के एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई उस मामले में की गई, जिसमें ऋषिकेश निवासी एक सीनियर सिटिजन से 69 लाख रुपये की साइबर ठगी की गई थी। गिरफ्तार आरोपी का वर्तमान ठिकाना लालकुआं बताया गया है, जिससे पूरे कुमाऊं क्षेत्र में भी इस मामले को लेकर हलचल मच गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़ित बुजुर्ग को व्हाट्सएप कॉल के जरिए साइबर ठगों ने अपने जाल में फंसाया। कॉल करने वालों ने खुद को दिल्ली के दरियागंज थाने का पुलिस इंस्पेक्टर तथा न्यायालय का अधिकारी बताकर पीड़ित को इस तरह डराया कि उनका आधार कार्ड अवैध सिम कार्ड लेने में इस्तेमाल हुआ है और वह सिम कथित रूप से मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर अपराध में प्रयुक्त हो रहा है।
ठगों ने बेहद सुनियोजित तरीके से पीड़ित को यह विश्वास दिलाया कि यदि वह तुरंत सहयोग नहीं करेंगे तो उन्हें कानूनी कार्रवाई, गिरफ्तारी और संपत्ति जब्ती जैसी गंभीर स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। इसके बाद आरोपियों ने “डिजिटल अरेस्ट”, संपत्ति सत्यापन, एनओसी, जमानत प्रक्रिया और केस निपटान जैसे नामों पर पीड़ित से अलग-अलग बैंक खातों में कुल 69 लाख रुपये जमा करवा लिए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर थाना देहरादून में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं तथा आईटी एक्ट की धारा 66D के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। इसके बाद उत्तराखंड एसटीएफ की साइबर क्राइम टीम ने तकनीकी साक्ष्यों, बैंक खातों के लेनदेन, मोबाइल नंबरों और डिजिटल ट्रेल के आधार पर गहन जांच शुरू की।
जांच के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। एसटीएफ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी भगवत सरन ने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर फर्जी जमानत पत्र, फीस रसीदें और अन्य कागजात तैयार किए थे, ताकि पीड़ित को यह भरोसा दिलाया जा सके कि मामला वास्तव में पुलिस और न्यायालय से जुड़ा हुआ है।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने एक्सिस बैंक में “रुद्रा टेलीकॉम” के नाम से एक बैंक खाता खुलवाया था, जिसका इस्तेमाल साइबर ठगी से प्राप्त रकम को ठिकाने लगाने के लिए किया जा रहा था। पुलिस के अनुसार, इस खाते के खिलाफ NCRP पोर्टल पर लगभग 30 शिकायतें दर्ज पाई गईं और इस खाते के माध्यम से लाखों रुपये का संदिग्ध लेनदेन हुआ। पीड़ित के 6 लाख रुपये भी इसी खाते में ट्रांसफर किए गए थे।
एसटीएफ टीम ने कार्रवाई करते हुए आरोपी भगवत सरन (33 वर्ष) को रुद्रपुर से गिरफ्तार कर लिया। आरोपी मूल रूप से बरेली, उत्तर प्रदेश का निवासी है, जबकि वर्तमान में उसका निवास लालकुआं, जनपद नैनीताल में बताया गया है। गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायालय में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
पुलिस ने आरोपी के कब्जे से बैंक खाते से जुड़े मोबाइल नंबर, दो डेबिट कार्ड तथा अन्य महत्वपूर्ण डिजिटल सुराग भी बरामद किए हैं। इन बरामद साक्ष्यों के आधार पर पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। संभावना जताई जा रही है कि यह कोई छोटा-मोटा गिरोह नहीं, बल्कि संगठित साइबर ठगी नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है।
एसटीएफ की जांच अब सिर्फ एक आरोपी तक सीमित नहीं है, बल्कि बैंक खातों, मोबाइल कनेक्शन, दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की गहन पड़ताल की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया और कितनी बड़ी रकम की साइबर ठगी को अंजाम दिया।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर होने वाली ठगी अब उत्तराखंड में भी तेजी से पैर पसार रही है। साइबर अपराधी पुलिस, सीबीआई, ईडी, कोर्ट या सरकारी एजेंसियों का नाम लेकर आम लोगों, खासकर बुजुर्गों को निशाना बना रहे हैं।
पुलिस और साइबर विशेषज्ञों ने आम जनता से अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति फोन, व्हाट्सएप कॉल या वीडियो कॉल के जरिए खुद को पुलिस, कोर्ट, सीबीआई, ईडी या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर गिरफ्तारी, जांच, जमानत, NOC, बैंक वेरिफिकेशन या डिजिटल अरेस्ट की बात करे, तो घबराएं नहीं, बल्कि तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी पुलिस/साइबर थाने से संपर्क करें।

 

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