डीएम नैनीताल का बड़ा आदेश, निजी स्कूलों की मनमानी पर लगेगी लगाम

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अजय अनेजा 👉 संपादक उत्तराखंड जागरण 👉
🔴 सख्त आदेश: निजी स्कूल मनमानी फीस, किताब-यूनिफॉर्म पर नहीं करेंगे दबाव
नैनीताल।
जिलाधिकारी नैनीताल ललित मोहन रयाल ने जनपद के निजी विद्यालयों द्वारा फीस निर्धारण, किताबों और यूनिफॉर्म को लेकर अपनाए जा रहे कथित व्यावसायिक रवैये पर सख्ती दिखाई है। प्राप्त शिकायतों के बाद जिलाधिकारी ने स्पष्ट आदेश जारी करते हुए कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत शिक्षा एक परोपकारी गतिविधि है, इसे लाभ कमाने का साधन नहीं बनाया जा सकता।
जिलाधिकारी ने कहा कि माननीय न्यायालयों के स्पष्ट निर्देश हैं कि कोई भी विद्यालय अभिभावकों को किसी एक दुकान या प्रकाशन से किताबें अथवा यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। ऐसा करना अनुचित व्यापार व्यवहार की श्रेणी में आता है।
उन्होंने निर्देश दिए कि शासनादेशों के अनुसार एनसीईआरटी/एससीईआरटी पुस्तकों को प्राथमिकता दी जाए। फीस में किसी भी प्रकार की वृद्धि पारदर्शी, औचित्यपूर्ण और अभिभावकों से संवाद के बाद ही की जाए। बिना ठोस कारण और अभिभावक/विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) से परामर्श के फीस बढ़ाने पर रोक रहेगी। फीस वृद्धि का लिखित औचित्य पिछले वर्षों के रिकॉर्ड सहित सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा।
जिलाधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि यूनिफॉर्म किसी विशेष दुकान से खरीदने की बाध्यता प्रतिबंधित रहेगी। यूनिफॉर्म का स्वरूप ऐसा हो जो सामान्य बाजार में आसानी से उपलब्ध हो और उसे बार-बार बदला न जाए। किताबों की खरीद में भी किसी विशेष प्रकाशन या दुकान से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष दबाव नहीं बनाया जाएगा तथा कॉपी-किताबों पर स्कूल का लोगो नहीं लगाया जाएगा।
पारदर्शिता के लिए सभी निजी विद्यालयों को अपने फीस स्ट्रक्चर, यूनिफॉर्म और पुस्तक सूची को विद्यालय के नोटिस बोर्ड एवं वेबसाइट (यदि उपलब्ध हो) पर प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा। निर्धारित शुल्क के अतिरिक्त कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा।
जिलाधिकारी ने मुख्य शिक्षाधिकारी को निर्देश दिए हैं कि जनपद के सभी निजी विद्यालयों का निरीक्षण जांच समिति के माध्यम से कराया जाए और अभिलेखीय साक्ष्यों सहित रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।

 

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