मानपुर-प्रतापपुर, कालीपुर, जसपुर खोलिया, त्रिलोकपुर दानी, हरिपुर ठटोला को राजस्व ग्राम बनाने की मांग तेज, 1200 ग्रामीणों ने नेता प्रतिपक्ष को सौंपा ज्ञापन

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अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉 हल्द्वानी 👉 मानपुर-प्रतापपुर, कालीपुर, जसपुर खोलिया, त्रिलोकपुर दानी, हरिपुर ठटोला को राजस्व ग्राम बनाने की मांग तेज, 1200 ग्रामीणों ने नेता प्रतिपक्ष को सौंपा ज्ञापन
हल्द्वानी। आजादी से पहले से बसे मानपुर, प्रतापपुर, कालीपुर, हरिपुर ठटोला, त्रिलोकपुर दानी, जसपुर खोलिया और मदनपुर सहित आसपास के गांवों को राजस्व ग्राम घोषित करने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। इसी मांग को लेकर ग्राम स्तरीय वनाधिकार समिति के अध्यक्ष नंदन सिंह के नेतृत्व में करीब 1200 ग्रामीण कांग्रेस की बैठक में पहुंचे और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के नाम नेता प्रतिपक्ष को ज्ञापन सौंपकर वर्षों पुरानी समस्या को प्रमुखता से उठाने की मांग की।
ग्रामीण करीब 5 बसों और 50 छोटी निजी गाड़ियों से कार्यक्रम स्थल तक पहुंचे। ग्रामीणों की एकजुटता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बड़ी संख्या में महिला-पुरुष एवं जनप्रतिनिधि अपनी मांग को लेकर बैठक में शामिल हुए। ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से राजस्व ग्राम का दर्जा दिए जाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अभी तक उनकी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।

ज्ञापन में कहा गया है कि क्षेत्र के ये गांव आजादी से भी पूर्व से बसे हुए हैं, लेकिन उचित मार्गदर्शन एवं प्रशासनिक प्रक्रिया के अभाव में आज तक राजस्व ग्राम के रूप में दर्ज नहीं हो पाए हैं। ग्रामीणों ने अपने पूर्वजों के वन विभाग के साथ लंबे समय तक चले न्यायिक संघर्ष का भी उल्लेख किया है।
ज्ञापन के अनुसार, वर्ष 1964 से 1970 तक वन विभाग के साथ न्यायालय में भूमि संबंधी विवाद चला। 16 फरवरी 1970 को न्यायालय ने ग्रामीणों के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। ग्रामीणों का कहना है कि इसके बावजूद न्यायालय के फैसले और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर भूमि को राजस्व अभिलेखों में दर्ज कराने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।
ग्रामीणों ने कांग्रेस नेतृत्व से मांग की कि इस महत्वपूर्ण विषय को लोकसभा और राज्यसभा के साथ-साथ राज्य स्तर पर भी प्रमुखता से उठाया जाए, ताकि मानपुर, प्रतापपुर, कालीपुर, हरिपुर ठटोला, त्रिलोकपुर दानी, जसपुर खोलिया और मदनपुर को राजस्व ग्राम घोषित करने की दिशा में ठोस कार्रवाई हो सके।
इस दौरान हयात सिंह, कैप्टन योगेंद्र सिंह, चंदन सिंह मेहता, सुरेंद्र सिंह, विजय बसेड़ा, देव सिंह संभल, प्रदीप भट्ट, सेवानिवृत्त अधिकारी एवं अन्य ग्रामीण प्रतिनिधियों ने ग्रामीणों को व्यवस्थित एवं सुरक्षित तरीके से कार्यक्रम स्थल तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सभी ग्रामीण शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांग रखते हुए ज्ञापन सौंपकर वापस लौटे।
ग्रामीणों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पक्ष-विपक्ष से उनकी एक ही मांग है—राजस्व ग्राम का दर्जा। वर्षों से चली आ रही इस मांग को लेकर ग्रामीणों में व्यापक एकजुटता दिखाई दी। ग्रामीणों का कहना है कि राजस्व ग्राम का दर्जा मिलने से क्षेत्र के लोगों को सरकारी योजनाओं, प्रशासनिक सुविधाओं और राजस्व संबंधी अधिकारों का लाभ अधिक सुगमता से मिल सकेगा।
ग्राम स्तरीय वनाधिकार समिति के अध्यक्ष नंदन सिंह ने कहा कि ग्रामीण लंबे समय से अपने अधिकार की लड़ाई लड़ रहे हैं। न्यायालय के पुराने फैसले और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर अब सरकार को इस दिशा में सकारात्मक पहल करते हुए गांवों को राजस्व ग्राम का दर्जा देना चाहिए।

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