अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉 हल्द्वानी 👉
रातोंरात बनी सड़क सुबह ही उखड़ी! हल्द्वानी में निर्माण गुणवत्ता की खुली पोल, निगम की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
24 घंटे भी नहीं टिक पाया सड़क मरम्मत का काम, डामर से अलग हुई बजरी; कमिश्नर और डीएम से जांच कर कार्रवाई की मांग
हल्द्वानी। शहर में सड़कों की मरम्मत और निर्माण की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। नवाबी रोड से जुड़ी कलावती कॉलोनी की लिंक सड़क पर रातोंरात किया गया निर्माण अगले दिन ही बदहाल हो गया। सड़क पर बिछाया गया डामर और बजरी अलग-अलग होने लगे, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। सड़क पर फैली बजरी दोपहिया वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का खतरा बन गई है। स्थानीय लोगों में इस लापरवाही को लेकर नाराजगी है और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
हैरानी की बात यह है कि जिस सड़क की लंबे समय बाद मरम्मत की गई, वह 24 घंटे भी ठीक हालत में नहीं टिक सकी। बुधवार रात कलावती कॉलोनी में सड़क की मरम्मत का काम किया गया था, लेकिन गुरुवार दोपहर तक डामर और गिट्टी एक-दूसरे से अलग होने लगी। सड़क की इस हालत ने निर्माण कार्य में इस्तेमाल की गई सामग्री और काम करने के तरीके पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
70 किलोमीटर सड़कों पर पैचवर्क की जरूरत
शहरी क्षेत्र की आंतरिक सड़कों की जिम्मेदारी नगर निगम के पास है। मानसून के बाद किए गए सर्वे में करीब 70 किलोमीटर सड़क पर गड्ढे भरने और पैचवर्क की आवश्यकता सामने आई थी। इसके बाद जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण से एक करोड़ रुपये की स्वीकृति मिलने पर अलग-अलग हिस्सों में मरम्मत कार्य शुरू किया गया। इसी क्रम में कलावती कॉलोनी की सड़क पर भी काम कराया गया, लेकिन अगले ही दिन सड़क की हालत ने पूरे कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए।
समाजसेवी ने वीडियो बनाकर उठाए सवाल
गुरुवार शाम मौके से गुजर रहे समाजसेवी विशाल वर्मा ने सड़क की बदहाली का वीडियो बनाकर इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित किया। उन्होंने शहर की सड़कों की स्थिति पर नाराजगी जताते हुए कहा कि कई सड़कें लंबे समय से खुदी और खराब पड़ी हैं। ऐसे में जब मरम्मत का काम किया जा रहा है, तो उसकी गुणवत्ता सुनिश्चित करना भी जरूरी है। उन्होंने मामले में कुमाऊं कमिश्नर और जिलाधिकारी से जांच कराकर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
वाहनों की आवाजाही को बताया वजह
जानकारी के अनुसार, कलावती कॉलोनी में गड्ढों को भरने के लिए 20 एमएम गिट्टी और डामर के मिश्रण की करीब पौन इंच मोटी परत बिछाई गई थी। इसे बिटुमिनस कंक्रीट बताया गया है। सहायक अभियंता नवल नौटियाल के अनुसार, निर्माण के बाद वाहनों की आवाजाही बंद नहीं होने के कारण सड़क की यह स्थिति बनी हो सकती है। उन्होंने निरीक्षण के बाद सड़क को दोबारा ठीक कराने की बात कही है।
हालांकि, सड़क की परत उखड़ने और डामर-गिट्टी अलग होने के वास्तविक कारणों का पता तकनीकी जांच के बाद ही चल सकेगा। अब सवाल यह है कि क्या संबंधित अधिकारी निर्माण कार्य की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच कराएंगे या सड़क को दोबारा ठीक कराने तक ही मामला सीमित रह जाएगा? शहरवासियों को उम्मीद है कि जिम्मेदारी तय होगी और भविष्य में सरकारी धन से होने वाले निर्माण कार्यों में गुणवत्ता की अनदेखी नहीं की जाएगी।

