बिंदुखत्ता में 29वें दिन भी गूंजा राजस्व ग्राम का नारा, “घोषणा नहीं, अधिसूचना चाहिए” पर अड़ा आंदोलन

अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉 लालकुआं 👉 बिन्दुखत्ता 👉 बिंदुखत्ता में 29वें दिन भी गूंजा राजस्व ग्राम का नारा, “घोषणा नहीं, अधिसूचना चाहिए” पर अड़ा आंदोलन
बिंदुखत्ता। बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा देने की मांग को लेकर वन अधिकार संगठन की पदयात्रा शनिवार को 29वें दिन भी जारी रही। तिवारी नगर स्थित हाट कालिका मंदिर से शुरू हुई पदयात्रा शास्त्री नगर होते हुए 17 एकड़ के पास स्थित भगवती मंदिर पहुंची। इस दौरान सैकड़ों महिला-पुरुषों ने “बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम बनाओ” और “घोषणा नहीं, अधिसूचना चाहिए” जैसे नारे लगाकर सरकार से तत्काल अधिसूचना जारी करने की मांग की।
पदयात्रा के दौरान आयोजित नुक्कड़ सभाओं में वक्ताओं ने सरकार पर राजस्व ग्राम की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद अधिसूचना जारी करने में देरी का आरोप लगाया। वक्ताओं ने कहा कि 19 जून 2024 को जिला स्तरीय समिति द्वारा सर्वसम्मति से प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है। ऐसे में अब बिंदुखत्ता की जनता जानना चाहती है कि अधिसूचना जारी करने में आखिर अड़चन कहां है।
स्वरचित गीतों से बताया बिंदुखत्ता का इतिहास
पदयात्रा में वन अधिकार संगठन के सदस्य दीपक पाठक ने स्वरचित गीतों के माध्यम से बिंदुखत्ता के इतिहास और राजस्व ग्राम की मांग को लोगों तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि बिंदुखत्ता की बसासत 1932 से भी पहले की है। 1932 के प्रमाण, वर्ष 1952 में स्थापित विद्यालय और 1960 के दशक में स्थापित दुग्ध डेयरी यहां की पुरानी बसासत के दस्तावेजी प्रमाण हैं। उन्होंने कहा कि वन विभाग स्वयं 1966 के बाद यहां आया।
दीपक पाठक ने कहा कि जब कागजी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है तो फिर देरी किस बात की है। उन्होंने दावा किया कि वन अधिकार कानून लागू होने के बाद देश के 1700 से अधिक वन ग्रामों को राजस्व ग्राम का दर्जा दिया जा चुका है, लेकिन बिंदुखत्ता की पत्रावली में आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद अधिसूचना लंबित है।
उन्होंने कहा कि बिंदुखत्ता की जनता वर्षों से सरकारों और जनप्रतिनिधियों के आश्वासन सुनती आई है। अब मामला आश्वासन का नहीं, सरकारी अधिसूचना का है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनता लोकतांत्रिक तरीके से अपना संघर्ष जारी रखेगी।
पदयात्रा में उमेश भट्ट, अर्जुन नाथ गोस्वामी, नंदन बोरा, चंचल सिंह कोरंगा, इंद्र सिंह पनेरी, हीरा सिंह बिष्ट, दौलत सिंह कोरंगा, खुशाल सिंह कोश्यारी, बलवंत बिष्ट, भवान सिंह कठायत, बलवंत सम्मल, कमल सिंह बिष्ट, रमेश बिष्ट, लोक कलाकार जीवन पाण्डे, दीपक पाठक, सोहन लाल, भरत नेगी, दीपक जोशी, भूपेश जोशी, करम सिंह कोरंगा, दानी कोरंगा, ममता बिष्ट और मीना मेहता सहित सैकड़ों महिलाएं, पुरुष और बच्चे शामिल रहे।
कल पदयात्रा बिंदुखेड़ा क्षेत्र में प्रवेश करेगी।