अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉 लालकुआं 👉 बिन्दुखत्ता 👉
बिंदुखत्ता में वन अधिकार कानून की गूंज, गीत-संगीत और नुक्कड़ नाटक से गरमाया राजस्व ग्राम आंदोलन
हल्दूचौड़। बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम बनाने की मांग को लेकर 15 अगस्त से शहीद स्मारक से शुरू हुई पदयात्रा लगातार जनसमर्थन जुटा रही है। विभिन्न गांवों से होते हुए पदयात्रा गुरुवार को रावत नगर पहुंची। बारिश के बावजूद सैकड़ों महिला-पुरुषों ने पदयात्रा में उत्साहपूर्वक भागीदारी की। आंदोलनकारियों ने अब गीत-संगीत, भजन, जनगीत और नुक्कड़ नाटक को जागरूकता का हथियार बनाते हुए वन अधिकार कानून की जानकारी ग्रामीणों तक पहुंचाने का अभियान तेज कर दिया है।
पदयात्रा के दौरान आज रात्रि गौला नदी के किनारे स्थित तीन मंदिर में रात्रिकालीन कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसमें ग्रामीणों को वन अधिकार अधिनियम, 2006, बिंदुखत्ता से जुड़े अभिलेखों और उनके अधिकारों की जानकारी सरल भाषा में दी जाएगी।
अभियान की खास बात यह है कि बिंदुखत्ता के स्थानीय कलाकार भी आंदोलन से जुड़कर ग्रामीणों को जागरूक कर रहे हैं। सोहनलाल, अर्जुन नाथ, कमल चौहान, केदार पाठक, दीपक पाठक, नीरज द्विवेदी, जीवन पांडेय, ललित मोहन जोशी, मथुरादत्त जोशी और लक्ष्मण दानू सहित अन्य कलाकार भजनों और जनगीतों के माध्यम से वन अधिकार कानून तथा बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम बनाने की मांग को लोगों तक पहुंचा रहे हैं।
जनगीतों के जरिए बिंदुखत्ता के इतिहास और अभिलेखों से जुड़े तथ्यों को भी ग्रामीणों के सामने रखा जा रहा है। कलाकारों के माध्यम से बताया जा रहा है कि बिंदुखत्ता की बसासत 1932 से पूर्व की है और वर्ष 1952 में यहां प्राथमिक विद्यालय की स्थापना हो चुकी थी। इसके बाद वन विभाग यहां बिना बंदोबस्ती के आया। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि वन पर तीन पीढ़ियों की निर्भरता से संबंधित प्रमाण भी सरकार को सौंपे जा चुके हैं।
ग्रामीणों को वन अधिकार कानून की उन बारीकियों से भी अवगत कराया जा रहा है, जिन्हें लेकर लंबे समय से भ्रम की स्थिति बनी हुई है। कार्यक्रमों में बताया जा रहा है कि तीन पीढ़ियों की शर्त का अर्थ यह नहीं है कि परिवार का प्रत्येक सदस्य लगातार 75 वर्षों से उसी स्थान पर निवास करता रहा हो। साथ ही वन अधिकार अधिनियम के तहत राजस्व ग्राम बनाने की प्रक्रिया से जुड़े प्रावधानों को भी सरल तरीके से समझाया जा रहा है।
संगठन के सचिव बलवंत बिष्ट ने कहा कि गीत, भजन, नुक्कड़ नाटक और जनसंवाद के माध्यम से कानून की जटिल बातों को ग्रामीणों तक सरल भाषा में पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जागरूकता का यह तरीका प्रभावी साबित हो रहा है और ग्रामीण पूरे उत्साह के साथ कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं।
बारिश के बीच भी पदयात्रा में उमड़ी भीड़ से साफ है कि बिंदुखत्ता राजस्व ग्राम का मुद्दा अब गांव-गांव तक पहुंच रहा है। पदयात्रा के साथ जनगीतों की गूंज और नुक्कड़ नाटकों के जरिए आंदोलन ने जागरूकता का नया रंग पकड़ लिया है।

