अजय अनेजा 👉 संपादक उत्तराखंड जागरण 👉
सदियों पुराना जल स्रोत सूखा, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल—समाजसेवी बृजवासी ने पुनर्जीवन की उठाई मांग
भीमताल।
जहां एक ओर शासन-प्रशासन जल संरक्षण को लेकर बड़े-बड़े दावे और सेमिनार करता है, वहीं झीलों के शहर भीमताल में सदियों से बहने वाला एक प्रमुख जल स्रोत पिछले करीब चार वर्षों से सूखा पड़ा है। कुमाऊं राजमार्ग पर स्थित यह जल स्रोत पहले लगभग 15 से 20 लीटर प्रति मिनट की क्षमता से लगातार बहता था और भीमताल झील को रिचार्ज करने का मुख्य स्रोत माना जाता था। इसके सूखने से स्थानीय लोगों में गहरी चिंता व्याप्त है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवनकाल में पहली बार इस जल स्रोत को पूरी तरह सूखा देखा है। इस स्रोत के बंद होने से आसपास के क्षेत्रों में पानी की गंभीर समस्या भी पैदा हो गई है। हैरानी की बात यह है कि जल संस्थान, सिंचाई विभाग, वन विभाग, विकास प्राधिकरण, नगर पंचायत और जिला प्रशासन के अधिकारी इस गंभीर मुद्दे पर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठा पाए हैं।
इस मामले को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता पूरन चंद्र बृजवासी लगातार आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले कई वर्षों में उन्होंने स्थानीय प्रशासन से लेकर मुख्यमंत्री तक इस जल स्रोत की जांच और पुनर्जीवन की मांग दर्जनों बार की है। वर्ष 2022 में मुख्यमंत्री के घोड़ाखाल मंदिर आगमन के दौरान उन्होंने स्वयं मुख्यमंत्री से इस विषय में मांग रखी थी। जिसके बाद मुख्यमंत्री कार्यालय से 11 मई 2022 को पत्रांक संख्या 4511 के माध्यम से प्रशासन को जांच के निर्देश भी जारी किए गए थे, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई।
बृजवासी का कहना है कि इसके बाद भी कुमाऊं आयुक्त, जिलाधिकारी, एसडीएम और मुख्य विकास अधिकारी स्तर से भी जांच के निर्देश दिए गए, लेकिन जल स्रोत आज तक सूखा पड़ा है। अब गर्मियों का मौसम नजदीक आने के कारण नगरवासियों की चिंता और बढ़ गई है।
उन्होंने कहा कि यदि इसी तरह जल धाराएं सूखती रहीं और प्रशासन जांच करने में ही उलझा रहा, तो जल संरक्षण पर बड़ी-बड़ी बातें करना केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगा।
इसी क्रम में बृजवासी ने एक बार फिर सहायक परियोजना निदेशक डीआरडीए चंद्रा फरत्याल से मुलाकात कर जल स्रोत की तत्काल जांच कराने और उसे पुनर्जीवित करने की मांग की है। इस पर फरत्याल ने आश्वासन दिया कि इस स्रोत को सरस परियोजना के तहत पुनर्जीवित करने की योजना बनाई जाएगी और इसके लिए बीडीओ भीमताल को आवश्यक निर्देश भी दिए गए हैं।







