अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉 हल्द्वानी 👉
12 करोड़ की कैथ लैब पर सीलन का हमला! उद्घाटन से पहले ही करोड़ों की मशीनें खतरे में, मरीजों की उम्मीदों पर पानी
एसटीएच में कार्डियोलॉजिस्ट की तैनाती अब तक नहीं, जर्मनी से आई करीब 9 करोड़ की अत्याधुनिक मशीनें नमी से खराब होने की आशंका
हल्द्वानी। सुशीला तिवारी अस्पताल (एसटीएच) में करीब 12 करोड़ रुपये की लागत से तैयार कैथ लैब उद्घाटन से पहले ही गंभीर लापरवाही की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। कैथ लैब भवन में सीलन और नमी ने दस्तक दे दी है, जिससे यहां स्थापित करीब 9 करोड़ रुपये की जर्मन तकनीक से बनी अत्याधुनिक मशीनों के खराब होने का खतरा पैदा हो गया है।
कैथ लैब का निर्माण हृदय रोगियों को स्थानीय स्तर पर एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया था। लंबे इंतजार के बाद इस वर्ष मरीजों को यह सुविधा मिलने की उम्मीद जगी थी, लेकिन अब तक यहां कार्डियोलॉजिस्ट (हृदय रोग विशेषज्ञ) की तैनाती नहीं हो सकी है। परिणामस्वरूप करोड़ों की मशीनें उपयोग में आने से पहले ही बंद पड़ी हैं।
हाल ही में निरीक्षण के दौरान कैथ लैब की दीवारों और छत पर सीलन तथा नमी साफ दिखाई दी। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी संवेदनशील मशीनों के लिए नियंत्रित तापमान और नमी रहित वातावरण आवश्यक होता है। लगातार सीलन रहने पर मशीनों के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को नुकसान पहुंच सकता है।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार कैथ लैब में तीन एयर कंडीशनर 24 घंटे संचालित रखे जा रहे हैं ताकि तापमान और नमी नियंत्रित रहे। इन एसी पर हर महीने 40 से 50 हजार रुपये तक बिजली खर्च हो रहा है, लेकिन भवन में आई सीलन के कारण मशीनों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।
उधर, मरीजों को अब भी हृदय संबंधी गंभीर उपचार के लिए दिल्ली, बरेली और अन्य शहरों का रुख करना पड़ रहा है। करोड़ों रुपये खर्च कर तैयार की गई कैथ लैब का समय पर संचालन न होने से मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
जिम्मेदारों का पक्ष
चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. अजय आर्य ने बताया कि जिस विशेषज्ञ का चयन हुआ था, उन्होंने आने से मना कर दिया। जल्द नई नियुक्ति कर कैथ लैब शुरू कराने का प्रयास किया जा रहा है।
एसटीएच के एमएस डॉ. अरुण जोशी ने कहा कि भवन के एक हिस्से में सीलन की समस्या आई है, जिसे जल्द ठीक कराया जाएगा। डॉक्टरों की नियुक्ति के लिए भी शासन स्तर पर कार्रवाई चल रही है।
फिलहाल सवाल यही है कि जब 12 करोड़ की कैथ लैब मरीजों के लिए तैयार बताई जा रही थी, तो भवन में सीलन जैसी गंभीर खामियों की समय रहते जांच क्यों नहीं हुई? यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो करोड़ों रुपये की मशीनें और मरीजों की उम्मीदें दोनों दांव पर लग सकती हैं।
