अब कोर्ट में दिखेगी कानून के छात्रों की ‘प्रैक्टिकल क्लास’, 10 दिवसीय प्रशिक्षण हुआ अनिवार्य देखें वीडियो

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अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉 बाजपुर  👉 उधमसिंह नगर 👉अब कोर्ट में दिखेगी कानून के छात्रों की ‘प्रैक्टिकल क्लास’, 10 दिवसीय प्रशिक्षण हुआ अनिवार्य
बाजपुर। कानून की पढ़ाई अब केवल किताबों तक सीमित नहीं रहेगी। बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के निर्देशों के तहत कुमाऊं विश्वविद्यालय, नैनीताल ने विधि पाठ्यक्रमों के अंतिम सेमेस्टर में अध्ययनरत छात्रों के लिए 10 दिवसीय व्यावसायिक प्रशिक्षण अनिवार्य कर दिया है। विश्वविद्यालय के इस फैसले के बाद अब छात्रों को न्यायालय की वास्तविक कार्यप्रणाली, वकालत की बारीकियों और न्यायिक प्रक्रियाओं को करीब से समझने का अवसर मिलेगा।


विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार एलएलबी त्रिवर्षीय पाठ्यक्रम के छठे सेमेस्टर तथा बीबीए-एलएलबी पंचवर्षीय पाठ्यक्रम के दसवें सेमेस्टर के सभी विद्यार्थियों को किसी वरिष्ठ अधिवक्ता के अधीन रहकर न्यायालय में प्रशिक्षण प्राप्त करना होगा। यह प्रशिक्षण पूरा करना डिग्री प्राप्त करने के लिए अनिवार्य माना जाएगा।
विश्वविद्यालय का कहना है कि यह कदम बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा निर्धारित कानूनी शिक्षा मानकों के अनुरूप उठाया गया है। इसका उद्देश्य छात्रों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित न रखकर उन्हें न्यायालय की वास्तविक परिस्थितियों, केस की तैयारी, बहस की प्रक्रिया और न्यायिक वातावरण से परिचित कराना है।
इस संबंध में सतेन्द्र चंद्र गुड़िया लॉ कॉलेज, काशीपुर ने बाजपुर क्षेत्र के वरिष्ठ अधिवक्ताओं से छात्रों को प्रशिक्षण देने हेतु सहयोग की अपील की है। कॉलेज प्रशासन ने कहा कि अनुभवी अधिवक्ताओं का मार्गदर्शन छात्रों के भविष्य को दिशा देने में बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा।
संस्था की ओर से कहा गया कि प्रशिक्षण के दौरान छात्र अदालतों में चल रही सुनवाई, फाइल प्रक्रिया, ड्राफ्टिंग, बहस की तैयारी और प्री-ट्रायल गतिविधियों को समझ सकेंगे। इससे छात्रों में व्यावहारिक ज्ञान और पेशेवर दक्षता का विकास होगा, जो आगे चलकर उनके कानूनी करियर में मजबूत आधार बनेगा।
बार काउंसिल ऑफ इंडिया के Rules of Legal Education 2008 के तहत प्रत्येक लॉ छात्र के लिए अंतिम वर्ष में कोर्ट विजिट, चैंबर विजिट और प्री-ट्रायल तैयारी सहित कुल 12 सप्ताह की इंटर्नशिप अनिवार्य की गई है। उसी प्रक्रिया के अंतर्गत यह 10 दिवसीय कोर्ट प्रशिक्षण भी आवश्यक किया गया है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी बार एसोसिएशन और अधिवक्ता संघों से अपील की है कि वे छात्रों को प्रशिक्षण उपलब्ध कराने में सहयोग करें, ताकि समय पर प्रशिक्षण पूर्ण हो सके और छात्रों का शैक्षणिक सत्र प्रभावित न हो।
कानून के क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि इस तरह का व्यावसायिक प्रशिक्षण छात्रों को शुरुआती दौर में ही न्यायिक व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर दिखाएगा और भविष्य में बेहतर अधिवक्ता तैयार करने में मददगार साबित होगा।

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