अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉 रुद्रपुर 👉
एक नंबर, एक चेसिस… दो स्विफ्ट डिजायर! रुद्रपुर ARTO में खुला ऐसा खेल कि अधिकारी भी रह गए हैरान
रुद्रपुर। संभागीय परिवहन कार्यालय (ARTO) रुद्रपुर में एक ऐसा हैरतअंगेज मामला सामने आया है, जिसने वाहन पंजीकरण और दस्तावेजी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कार्यालय परिसर में एक ही रजिस्ट्रेशन नंबर और एक ही चेसिस नंबर वाली दो स्विफ्ट डिजायर कारें आमने-सामने खड़ी मिलीं। दोनों कारों को देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए कि आखिर असली वाहन कौन सा है और दूसरे वाहन की पहचान में इतनी बड़ी गड़बड़ी कैसे हुई।

मामला उस समय सामने आया जब हरिद्वार के ज्वालापुर निवासी सहदेव कुमार पाल अपनी कार संख्या UK-06 AN-0807 का इंश्योरेंस रिन्यू कराने रुद्रपुर ARTO कार्यालय पहुंचे। बीमा संबंधी प्रक्रिया के दौरान सिस्टम में वाहन का रिकॉर्ड चेक किया गया तो पता चला कि इसी नंबर के वाहन का बीमा किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर दर्ज है। मामला संदिग्ध लगने पर विभागीय अधिकारियों ने रिकॉर्ड की गहन जांच शुरू की।

रिकॉर्ड खंगालने पर यही वाहन नैनीताल जिले के कालाढूंगी क्षेत्र के ग्राम धमोला निवासी नीरज कुमार के नाम पर भी पंजीकृत पाया गया। इसके बाद उप सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी मोहित कोठारी ने नीरज कुमार को भी उनकी स्विफ्ट डिजायर के साथ ARTO कार्यालय बुलाया।

जब दोनों वाहन कार्यालय परिसर में आमने-सामने खड़े किए गए तो पूरा मामला और चौंकाने वाला निकला। दोनों वाहनों का रजिस्ट्रेशन नंबर एक ही था और शुरुआती तकनीकी जांच में दोनों के चेसिस नंबर भी हूबहू समान पाए गए। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि दोनों में वास्तविक वाहन कौन सा है और दूसरे वाहन पर चेसिस नंबर की नकल या छेड़छाड़ किस स्तर पर की गई?
दस्तावेजों ने बढ़ाया शक
जांच के दौरान नीरज कुमार ने बताया कि उन्होंने वाहन केलाखेड़ा के एक स्थानीय कार डीलर के माध्यम से खरीदा था। वाहन ट्रांसफर से जुड़े दस्तावेजों में सहदेव कुमार पाल के नाम से जुड़ा पहचान पत्र भी सामने आया। लेकिन जांच में पहचान पत्र का नंबर सहदेव कुमार का होने के बावजूद फोटो और जन्मतिथि किसी अन्य व्यक्ति की पाई गई। इससे पूरे मामले में फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल की आशंका और गहरा गई है।
विभागीय पड़ताल में यह भी सामने आया कि संबंधित स्विफ्ट डिजायर वाहन शुरुआती दौर में रुद्रपुर के एक डॉक्टर के नाम पर पंजीकृत थी। इसके बाद वाहन अलग-अलग डीलरों और खरीदारों के माध्यम से ट्रांसफर होता रहा। अब पुराने ट्रांसफर रिकॉर्ड, एनओसी, बिक्री दस्तावेज और संबंधित डीलर की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
मारुति की तकनीकी जांच से खुलेगा राज
मामले की असलियत सामने लाने के लिए मारुति की तकनीकी टीम से जांच कराई जा रही है। विशेषज्ञ दोनों कारों के चेसिस नंबर की पंचिंग, इंजन नंबर, मेटल स्ट्रक्चर और वाहन की आंतरिक तकनीकी पहचान की जांच करेंगे। इसके बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि वास्तविक चेसिस नंबर किस वाहन का है और दूसरे वाहन में नंबर के साथ किस स्तर पर छेड़छाड़ की गई।
फिलहाल ARTO की जांच जारी है। एक ही नंबर और एक ही चेसिस वाली दो कारों का आमने-सामने आना महज तकनीकी गलती है या इसके पीछे फर्जीवाड़े का बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है—इसका खुलासा तकनीकी रिपोर्ट और पुराने परिवहन रिकॉर्ड के मिलान के बाद ही होगा।

