अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉 लालकुआं 👉 बिन्दुखत्ता 👉
बिंदुखत्ता राजस्व ग्राम पर सियासत गरम, नेताओं पर बरसे उमेश भट्ट—“वादों से नहीं, अधिसूचना से मिलेगा हक”
बिंदुखत्ता। बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम घोषित कराने की मांग को लेकर 15 अगस्त से जारी संयुक्त पदयात्रा बुधवार को भी जारी रही। वन अधिकार संगठन, पूर्व सैनिक संगठन, राज्य आंदोलनकारी संगठन और गौला संघर्ष समिति समेत विभिन्न संगठनों की ओर से निकाली जा रही पदयात्रा में सार्वजनिक अवकाश के चलते बड़ी संख्या में स्कूली बच्चों सहित ग्रामीणों ने भागीदारी की। बच्चों ने बिंदुखत्ता राजस्व ग्राम के समर्थन में नारे लगाते हुए 27 सितंबर को लालकुआं तहसील में प्रस्तावित रैली में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने का आह्वान किया।
पदयात्रा संजयनगर-2 स्थित जगदंबा मंदिर पहुंचकर समाप्त हुई। यहां रात्रि में कीर्तन-भजन और नुक्कड़ नाटक के जरिए ग्रामीणों को राजस्व ग्राम और वन अधिकार कानून के प्रति जागरूक किया जाएगा। पदयात्रा गुरुवार को रावतनगर की ओर रवाना होगी।
इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि वन अधिकार कानून (एफआरए) वन क्षेत्रों में पीढ़ियों से निवास कर रहे समुदायों के साथ हुए ऐतिहासिक अन्याय के निवारण के लिए बनाया गया है। उनका दावा है कि इसके तहत न तो केंद्र सरकार की अनुमति आवश्यक है और न ही 75 वर्षों से एक ही स्थान पर निवास करने की शर्त अनिवार्य है। संगठन का आरोप है कि प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद बिंदुखत्ता की अधिसूचना जारी नहीं की जा रही है।
राजनीतिक दलों पर जमकर साधा निशाना
वन अधिकार संगठन के अध्यक्ष उमेश भट्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी, पूर्व कैबिनेट मंत्री हरीश दुर्गापाल, सांसद अजय भट्ट और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य पर बिंदुखत्ता राजस्व ग्राम के मुद्दे पर ठोस पहल नहीं करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यदि बिंदुखत्ता के दावों में कोई कमी है तो सरकार और संबंधित नेताओं को उसे लिखित अभिलेखों के साथ सार्वजनिक करना चाहिए और कमियां दूर कराने के लिए पहल करनी चाहिए।
उमेश भट्ट ने कहा कि सरकार इच्छाशक्ति दिखाए तो रामनगर और हरिद्वार की तर्ज पर बिंदुखत्ता की अधिसूचना भी जल्द जारी हो सकती है। उन्होंने विधानसभा में बिंदुखत्ता का मुद्दा उठाने के लिए नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य का आभार जताया, लेकिन कहा कि केवल यह कहना कि राजस्व ग्राम बनाना मुख्यमंत्री के अधिकार क्षेत्र में है, विपक्ष की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने जैसा है। उन्होंने विपक्ष से भी सरकार पर लगातार दबाव बनाने की मांग की।
चुनावी तैयारियों के बीच फिर उठे सवाल
उमेश भट्ट ने आरोप लगाया कि पूर्व विधायक नवीन दुमका, दीपेंद्र कोश्यारी, हरेंद्र बोरा और नंदन दुर्गापाल सहित कई नेता बिंदुखत्ता में नुक्कड़ सभाएं कर चुनावी तैयारियों में जुटे हैं, लेकिन राजस्व ग्राम के सवाल पर जनता को ठोस जवाब नहीं दे पा रहे हैं। उन्होंने वन अधिकार कानून के तहत संघर्ष कर रही समिति का साथ नहीं देने का भी आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि चुनाव के समय राजस्व ग्राम का मुद्दा फिर जोर पकड़ता है और जनता से वादे किए जाते हैं, लेकिन अब ग्रामीण केवल आश्वासन नहीं, बल्कि राजस्व ग्राम की अधिसूचना चाहते हैं। पदयात्रा में शामिल संगठनों ने 27 सितंबर की प्रस्तावित रैली को निर्णायक बनाने के लिए गांव-गांव जनसंपर्क तेज करने का ऐलान किया है।

