उत्तराखंड में भू-कानून तोड़ने वालों को चेतावनी: डीएम ललित मोहन रयाल का बड़ा फैसला, 250 वर्ग मीटर जमीन गई सरकार के नाम

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अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉 नैनीताल 👉
जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल की बड़ी कार्रवाई: भू-कानून तोड़ने पर 250 वर्ग मीटर भूमि सरकार के नाम निहित

सतबूंगा में अतिरिक्त भूमि खरीदना पड़ा भारी, जांच में भू-कानून का उल्लंघन सिद्ध; राजस्व अभिलेखों में प्रविष्टि कर कब्जा लेने के निर्देश
नैनीताल। उत्तराखंड में भू-कानून के उल्लंघन के मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए जिलाधिकारी नैनीताल ललित मोहन रयाल ने बड़ी कार्रवाई की है। ग्राम सतबूंगा स्थित 250 वर्ग मीटर भूमि को राज्य सरकार में निहित (वेस्ट) करने के आदेश जारी किए गए हैं। यह फैसला सभी पक्षों की सुनवाई, उपलब्ध साक्ष्यों और राजस्व अभिलेखों के परीक्षण के बाद लिया गया।
जांच में सामने आया कि पूनम त्रिखा, निवासी बल्लभगढ़ (हरियाणा), के नाम पहले से ही ग्राम खपराड़ में 500 वर्ग मीटर भूमि दर्ज है। इसके बावजूद उनके पति राकेश त्रिखा ने ग्राम सतबूंगा में अतिरिक्त 250 वर्ग मीटर भूमि खरीद ली। मामले की जांच में यह खरीद उत्तराखंड के प्रचलित भू-कानून के प्रावधानों के विपरीत पाई गई।
सुनवाई के दौरान प्रतिवादियों ने दावा किया कि दोनों अलग-अलग रह रहे हैं, लेकिन जिला शासकीय अधिवक्ता ने स्पष्ट किया कि दोनों का कानूनी रूप से तलाक नहीं हुआ है और 500 वर्ग मीटर भूमि अब भी पूनम त्रिखा के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज है। ऐसे में पति द्वारा अतिरिक्त भूमि की खरीद भू-कानून का उल्लंघन मानी गई।
मामले में सभी पक्षों को सुनने और अभिलेखों का परीक्षण करने के बाद जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने 250 वर्ग मीटर भूमि को राज्य सरकार में निहित करने के आदेश जारी कर दिए। साथ ही उपजिलाधिकारी नैनीताल को निर्देश दिए गए हैं कि राजस्व अभिलेखों में आवश्यक प्रविष्टि कर भूमि का कब्जा राज्य सरकार के पक्ष में लिया जाए।
जिला प्रशासन की इस कार्रवाई को उत्तराखंड के भू-कानून के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दिया है कि भू-कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आगे भी इसी प्रकार की सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

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