बिंदुखत्ता राजस्व ग्राम की मांग पर पदयात्रा का 12वां दिन, 400 लोगों ने दिखाई ताकत; विधायक के आरोपों पर संगठन का पलटवार

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अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉 लालकुआं 👉 बिन्दुखत्ता 👉
बिंदुखत्ता राजस्व ग्राम की मांग पर पदयात्रा का 12वां दिन, 400 लोगों ने दिखाई ताकत; विधायक के आरोपों पर संगठन का पलटवार
27 सितंबर की रैली में भीड़ जुटाने के लिए 200 से अधिक घरों में जनसंपर्क, सरकार से अधिसूचना जारी करने की मांग
बिंदुखत्ता। बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम घोषित करने की मांग को लेकर चल रही पदयात्रा मंगलवार को 12वें दिन संजय नगर के दो और तीन नंबर क्षेत्रों से होते हुए हाटकालिका मंदिर पहुंची। पदयात्रा में करीब 400 लोगों ने भाग लिया। इस दौरान आंदोलनकारियों ने 200 से अधिक घरों में जनसंपर्क कर लोगों से आगामी 27 सितंबर की प्रस्तावित रैली में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने का आह्वान किया।
पदयात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर नुक्कड़ सभाएं भी आयोजित की गईं। सभाओं में वक्ताओं ने कहा कि बिंदुखत्ता के लोगों की राजस्व ग्राम की मांग लंबे समय से लंबित है। उन्होंने सरकार से मांग की कि मामले में अनावश्यक देरी किए बिना बिंदुखत्ता राजस्व ग्राम की अधिसूचना शीघ्र जारी की जाए।
विधायक के आरोपों पर संगठन का पलटवार
लालकुआं विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट द्वारा वन अधिकार संगठन पर लगाए गए आरोपों पर संगठन के अध्यक्ष उमेश भट्ट ने पलटवार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि विधायक अनर्गल और लच्छेदार बयानबाजी कर लोगों को 27 सितंबर की रैली में जाने से रोकने का प्रयास कर रहे हैं।
उमेश भट्ट ने कहा कि यदि विधायक ने सही समय पर इस मामले को पूरा करवाने के गंभीर प्रयास किए होते तो आज ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती। उन्होंने कहा कि 25 नवंबर 2025 को डीएलसी द्वारा पत्रावली के पुनः परीक्षण के आदेश वन अधिकार कानून के प्रावधानों के विपरीत हैं, जिसका वन अधिकार समिति लगातार विरोध कर रही है।
उन्होंने बताया कि समिति मुख्य सचिव से सुनवाई और विधिसम्मत कार्रवाई की मांग को लेकर हर माह पत्र भेज रही है, लेकिन अभी तक सुनवाई नहीं हुई है। उनका कहना है कि विधायक को वन अधिकार समिति पर आरोप लगाने के बजाय मुख्य सचिव स्तर पर लंबित पत्रावली पर विधिसम्मत कार्रवाई करवाने के प्रयास करने चाहिए।
‘समिति दर्जनों बार डीएम से मिल चुकी’
उमेश भट्ट ने विधायक के उस कथन को भी भ्रामक बताया, जिसमें पत्रावली में ‘संस्तुति’ शब्द नहीं होने और वन अधिकार समिति के जिलाधिकारी से नहीं मिलने को अधिसूचना जारी न होने का कारण बताया गया है। उन्होंने कहा कि वन अधिकार समिति दर्जनों बार जिलाधिकारी से मिल चुकी है और इस संबंध में लगातार पत्राचार भी किया गया है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में जिलाधिकारी द्वारा पत्रावली के पुनः परीक्षण के आदेश दिए जा चुके हैं। ऐसे में अब बार-बार जिलाधिकारी से मिलने के बजाय शासन स्तर पर लंबित अपील की सुनवाई कराकर विधिसम्मत निर्णय कराने की मांग करना अधिक उचित है।
पदयात्रा में नए लोग भी जुड़े
12वें दिन की पदयात्रा में मोहन सिंह धामी, होशियार जेठी, दलीप अधिकारी, प्रकाश मिश्र, प्रकाश राम, गोविंद राम, रघुवीर बिष्ट, पुष्कर दुबड़िया, किशन धामी, शंकर लाल, बलवंत कोरंगा, भोपाल सिंह, ललित पलड़िया, प्रेम सिंह खोलिया, जगदीश चौहान, दीपक सिंह भाट, दिनेश भट्ट, शंकर राम, मोहन बसवाल, लक्ष्मण पटवाल, जगदीश जोशी, प्रकाश शाही, चंदन मेहता, रमेश फुलारा, जोध सिंह, दीवान सिंह बरगली, भरत गोसाई, गोविंद गिरी सहित कई लोग शामिल हुए। संगठन ने दावा किया कि पदयात्रा के दौरान बड़ी संख्या में नए लोग आंदोलन से जुड़े हैं।

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