14.10 फीट केश, पांच बेटों का दर्द और 25 साल श्मशान में साधना—फिर भी गुमनाम संतोष नाथ!

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अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉
14.10 फीट केश, पांच बेटों का दर्द और 25 साल श्मशान में साधना—फिर भी गुमनाम संतोष नाथ!
वृद्धाश्रम में एकांत जीवन जी रहीं संतोष नाथ, दुनिया के रिकॉर्ड से भी लंबे बताए जा रहे उनके केश बने साधना और संघर्ष की पहचान
सिर पर 14.10 फीट लंबे लहराते केश, हाथों में वॉकर का सहारा और आंखों में वर्षों के दर्द का सन्नाटा। आश्रय सेवा समिति वृद्धाश्रम में एकांत जीवन बिता रहीं संतोष नाथ को देखकर हर कोई ठिठक जाता है। उनके असाधारण रूप से लंबे केश महज कौतूहल का विषय नहीं, बल्कि उस जिंदगी की मूक कहानी हैं, जिसमें एक मां ने अपने पांच बेटों को खोया, गृहस्थ जीवन त्यागा और करीब 25 वर्षों तक श्मशान घाट में साधना की।
वर्ष 1960 में स्वर्गीय वेद प्रकाश के साथ विवाह के बाद शीला देवी का जीवन पांच बेटों की खुशियों से भरा था। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। एक-एक कर पांचों बेटों की मौत ने उनके जीवन में ऐसा शून्य पैदा किया, जिससे निकलना उनके लिए आसान नहीं था।
इसी दौर में उन्हें गुरु शंभूनाथ की शरण मिली। वर्ष 1990 में दीक्षा लेकर उन्होंने संन्यास का मार्ग अपना लिया। गृहस्थ जीवन से पूरी तरह विरक्त होकर वह करीब 25 वर्षों तक श्मशान घाट की खामोशी के बीच साधना करती रहीं। इसी दौरान उनके केश बढ़ते गए और आज ये केश 14.10 फीट, यानी करीब 4.30 मीटर लंबे हो चुके हैं।
मंदिर टूटा, जमीन को लेकर विवाद और जिंदगी ने फिर दिया जख्म
श्मशान में वर्षों की साधना के बाद संतोष नाथ को दान में मिली जमीन पर बने मंदिर में आश्रय मिला। लेकिन वर्ष 2021 में सड़क चौड़ीकरण के दौरान मंदिर ढहा दिया गया। इसके बाद जमीन को लेकर विवाद खड़ा हो गया। संतोष नाथ का आरोप है कि कूटरचित तरीके से उनकी जमीन पर कब्जा किया गया।
उनके मुताबिक विरोध करने पर उनके साथ दुर्व्यवहार हुआ और सामान बाहर फेंक दिया गया। इसी घटनाक्रम के दौरान उनका कूल्हा टूट गया। हालत ऐसी हुई कि वह चलने-फिरने में असमर्थ हो गईं। जनवरी 2022 में स्थानीय लोगों ने उन्हें आश्रय सेवा समिति वृद्धाश्रम पहुंचाया, जहां वह आज भी रह रही हैं।
रोज घंटों केशों की सेवा, बाल बने जीवन की पहचान
वृद्धाश्रम में संतोष नाथ की दिनचर्या का बड़ा हिस्सा अपने लंबे केशों को सहेजने में गुजरता है। वह घंटों उनकी मालिश करती हैं, उन्हें व्यवस्थित करती हैं और फिर लपेटकर रखती हैं।
उनके लिए ये बाल केवल शारीरिक पहचान नहीं हैं। वह इन्हें अपनी साधना, त्याग और बीते जीवन की स्मृतियों से जोड़कर देखती हैं। श्मशान घाट में बिताए 25 वर्षों का एकांत, पांच बेटों को खोने का दर्द और जीवन के संघर्ष—इन सबकी कहानी जैसे इन केशों में समाई हुई है।
रिकॉर्ड से भी लंबे केश, लेकिन रिकॉर्ड बुक से दूर
संतोष नाथ के 14.10 फीट लंबे केश अपने आप में असाधारण हैं। उपलब्ध गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड जानकारी के मुताबिक जीवित महिला के सबसे लंबे बालों का रिकॉर्ड 8 फीट 10 इंच दर्ज है। इस लिहाज से संतोष नाथ के 14.10 फीट लंबे केश उस रिकॉर्ड से काफी अधिक हैं।
हालांकि, रिकॉर्ड के आधिकारिक दावे और प्रमाणन के लिए संबंधित संस्था की औपचारिक जांच व सत्यापन जरूरी होता है। संतोष नाथ का नाम अभी किसी आधिकारिक रिकॉर्ड बुक में दर्ज नहीं है।
आज वृद्धाश्रम के एक शांत कमरे में संतोष नाथ बिना किसी प्रचार और प्रसिद्धि की चाह के अपना जीवन जी रही हैं। उनके सिर पर लिपटे 14.10 फीट लंबे केश दूर से ही लोगों का ध्यान खींचते हैं, लेकिन करीब से देखने पर ये केश किसी तमाशे से ज्यादा एक मां के अथाह दुख, संन्यास, साधना और संघर्ष की कहानी सुनाते नजर आते हैं।
दुनिया रिकॉर्ड तलाशती है, लेकिन संतोष नाथ की जिंदगी में शायद रिकॉर्ड से कहीं बड़ा दर्द दर्ज है।

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