बिन्दुखत्ता को फिर झटका! एक लाख आबादी की उम्मीदों पर हाईकोर्ट की मुहर—राजस्व गांव की राह अटकी”

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अजय अनेजा पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉 लालकुआं 👉 बिन्दुखत्ता 👉 🛑 

“बिन्दुखत्ता को फिर झटका! एक लाख आबादी की उम्मीदों पर हाईकोर्ट की मुहर—राजस्व गांव की राह अटकी”

📍 बिन्दुखत्ता / नैनीताल | उत्तराखंड जागरण

बिन्दुखत्ता को राजस्व गांव बनाने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर नैनीताल हाई कोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए याचिका को निस्तारित कर दिया है। इस फैसले से क्षेत्र की करीब एक लाख आबादी की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है।

मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने याचिका को निस्तारित कर दिया।

👉 क्या था मामला?

चोरगलिया निवासी सामाजिक कार्यकर्ता भुवन पोखरिया ने जनहित याचिका दायर कर कहा था कि बिन्दुखत्ता में लगभग एक लाख की आबादी निवास करती है, लेकिन आज तक इसे राजस्व गांव का दर्जा नहीं मिल पाया।

याचिका में यह भी बताया गया कि:

प्रदेश के दो-दो मुख्यमंत्री बिन्दुखत्ता को राजस्व गांव बनाने की घोषणा कर चुके हैं

लेकिन 2 दिसंबर 2025 को सरकार ने इस घोषणा को विलोपित कर दिया

जबकि हरिद्वार के पथरी क्षेत्र के वन ग्रामों और हल्द्वानी के दमुवाढूंगा को यह दर्जा मिल चुका है

⚖️ वनाधिकार कानून का हवाला

याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि बिन्दुखत्ता को वनाधिकार अधिनियम 2006 के तहत राजस्व गांव घोषित किया जाए, ताकि वहां के लोगों को मूलभूत सुविधाएं और अधिकार मिल सकें।

📢 अब आगे क्या?

हाईकोर्ट द्वारा याचिका निस्तारित किए जाने के बाद अब बिन्दुखत्ता के लोगों की निगाहें सरकार पर टिक गई हैं।

👉 सबसे बड़ा सवाल—क्या एक लाख की आबादी को अब भी इंतजार करना पड़ेगा या सरकार खुद कोई ठोस कदम उठाएगी?

 

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