“पंतनगर में बेकाबू जनाक्रोश: बेहड़ की हुंकार— ‘शुक्ला जवाब दो, क्यों छीना गरीबों का हक!’” देखें वीडियो

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अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉 रुद्रपुर 👉 पंतनगर 👉🔥 पंतनगर में पुनर्वास को लेकर फूटा जनआक्रोश, विधायक बेहड़ की मशाल यात्रा में उमड़ा जनसैलाब 🔥
पंतनगर/किच्छा। पंतनगर एयरपोर्ट विस्तारीकरण के चलते प्रभावित हो रहे सैकड़ों परिवारों के पुनर्वास की मांग को लेकर शनिवार को पंतनगर में जनआक्रोश खुलकर सामने आया। मस्जिद कॉलोनी, संजय कॉलोनी और वाल्मीकि कॉलोनी से शुरू हुई विशाल मशाल यात्रा पंतनगर यूनिवर्सिटी गेट तक पहुंची, जिसमें क्षेत्र के हजारों लोगों ने भाग लेकर अपनी आवाज बुलंद की।
हाथों में मशालें और “पुनर्वास दो, न्याय दो” के नारों के साथ निकली इस यात्रा ने पूरे क्षेत्र का माहौल गर्मा दिया। महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों की बड़ी भागीदारी ने यह साफ कर दिया कि यह आंदोलन अब जनआंदोलन का रूप ले चुका है।


इस मशाल यात्रा का नेतृत्व किच्छा विधायक तिलक राज बेहड़ ने किया। इस दौरान उन्होंने जनसभा को संबोधित करते हुए सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला बोला। बेहड़ ने कहा कि विकास के नाम पर गरीब और वर्षों से बसे लोगों को उजाड़ना किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा, “जनहित सर्वोपरि है, लेकिन जनहित के नाम पर लोगों के अधिकारों का हनन नहीं होना चाहिए। जब तक हर प्रभावित परिवार को सम्मानजनक पुनर्वास और स्पष्ट गारंटी नहीं मिलती, यह संघर्ष लगातार जारी रहेगा।”
अपने भाषण के दौरान बेहड़ ने शुक्ला पर भी निशाना साधते हुए कहा कि अगर प्रभावित लोगों को उनका मालिकाना हक दिला दिया जाए, तो वे खुद उनके घर जाकर गले में माला पहनाकर सम्मानित करेंगे। उनके इस बयान पर मौके पर मौजूद लोगों ने जोरदार समर्थन और तालियों के साथ स्वागत किया।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे लंबे समय से अनिश्चितता और डर के माहौल में जी रहे हैं। उन्हें न तो स्पष्ट पुनर्वास योजना मिली है और न ही उनके भविष्य को लेकर कोई ठोस आश्वासन। ऐसे में अब उनके पास आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
मशाल यात्रा के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल भी तैनात रहा, हालांकि पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ।
क्षेत्रवासियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि जल्द ही सरकार और प्रशासन द्वारा ठोस पुनर्वास नीति लागू नहीं की गई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
यह मशाल यात्रा केवल विरोध नहीं, बल्कि अपने अधिकारों और सम्मानजनक जीवन की मांग का प्रतीक बनकर उभरी है। पंतनगर के लोग अब निर्णायक लड़ाई के मूड में हैं और जब तक न्याय नहीं मिलेगा, उनका संघर्ष थमने वाला नहीं है।

 

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