लालकुआ कुमाऊं के प्रवेश द्वार रेलवे स्टेशन पर गंदगी का अंबार, रेलवे के सरकारी बोर्ड पर भी नेताओं का कब्जा करोड़ों के ठेके के बावजूद सफाई जिरो उत्तराखंड जागरण की खास कवरेज अधिकारी मस्त जनता त्रस्त :देखें वीडियो

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अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉 लालकुआं 👉 🛑
कुमाऊं के प्रवेश द्वार लालकुआं रेलवे स्टेशन पर गंदगी का अंबार, करोड़ों के ठेके के बावजूद सफाई नदारद
लालकुआं। कुमाऊं का प्रवेश द्वार कहे जाने वाले लालकुआं रेलवे स्टेशन की स्थिति इन दिनों बेहद चिंताजनक बनी हुई है। देश-विदेश से आने वाले यात्रियों का स्वागत यहां साफ-सफाई से नहीं, बल्कि गंदगी के ढेर और बदहाल व्यवस्थाओं से हो रहा है। रेलवे प्रशासन, ठेकेदार और जिला प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा सीधे यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है।


स्टेशन परिसर में चारों ओर गंदगी फैली हुई है। प्लेटफॉर्म से लेकर प्रतीक्षालय तक सफाई का अभाव साफ दिखाई देता है। हालात इतने खराब हैं कि रेलवे द्वारा लगाए गए सरकारी सूचना बोर्ड तक नेताओं के पोस्टरों से पाट दिए गए हैं, जिससे व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सबसे गंभीर स्थिति स्टेशन के शौचालय की है, जो पिछले लगभग दो महीने से बंद पड़ा हुआ है। बताया जा रहा है कि पूरे स्टेशन पर यात्रियों के लिए यही एकमात्र शौचालय उपलब्ध है। इसके बंद होने से यात्रियों, खासकर महिलाओं और बुजुर्गों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सूत्रों के अनुसार, सफाई व्यवस्था के लिए रेलवे विभाग द्वारा ठेकेदार को करोड़ों रुपये का ठेका दिया गया है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति बिल्कुल विपरीत नजर आती है। आरोप है कि सरकारी धन की बंदरबांट हो रही है और ठेकेदार पर किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की जा रही। बड़े अधिकारियों का भी इस पर कोई प्रभाव नहीं दिख रहा, जिससे साफ है कि ठेकेदार को किसी का डर नहीं है।

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स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायतों के बावजूद न तो रेलवे प्रशासन जाग रहा है और न ही जिला प्रशासन इस ओर ध्यान दे रहा है। स्टेशन मास्टर की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतनी बड़ी लापरवाही के बावजूद कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया जा रहा।
यह स्थिति सीधे तौर पर स्वच्छ भारत मिशन की मंशा पर भी सवाल खड़े करती है, जिसका उद्देश्य देश को स्वच्छ और सुंदर बनाना है। लेकिन लालकुआं रेलवे स्टेशन की बदहाल तस्वीर इस अभियान को ठेंगा दिखाती नजर आ रही है।
अब देखना होगा कि क्या सरकार और प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर संज्ञान लेते हैं या फिर यात्रियों को इसी तरह गंदगी और अव्यवस्थाओं के बीच सफर करने को मजबूर रहना पड़ेगा।

 

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