“विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट को ज्ञापन सौंपने के बाद रिसीविंग न मिलने का आरोप, आरटीआई कार्यकर्ता ने मांगी पारदर्शी व्यवस्था”

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अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉 लालकुआं 👉 हल्दुचौड़ं 👉
ज्ञापन की रिसीविंग को लेकर आरटीआई कार्यकर्ता ने उठाए सवाल, जनप्रतिनिधियों से पारदर्शी व्यवस्था की मांग
लालकुआं। जनता की समस्याओं को लेकर दिए जाने वाले ज्ञापनों की प्राप्ति रसीद (रिसीविंग) को लेकर अब लालकुआं विधानसभा क्षेत्र में चर्चा शुरू हो गई है। आरटीआई कार्यकर्ता जसवीर उत्तराखंडी ने आरोप लगाया है कि उन्होंने जनसमस्याओं से संबंधित ज्ञापन सौंपा, लेकिन उन्हें उसकी प्राप्ति रसीद उपलब्ध नहीं कराई गई।
आरटीआई कार्यकर्ता जसवीर उत्तराखंडी के अनुसार, उन्होंने हल्दूचौड़ मुख्य बाजार की विभिन्न समस्याओं को लेकर विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट को ज्ञापन सौंपा था। ज्ञापन में सार्वजनिक शौचालय निर्माण, कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था और आवारा पशुओं की समस्या के समाधान सहित कई जनहित के मुद्दे शामिल थे।
जसवीर उत्तराखंडी का कहना है कि ज्ञापन देने के बाद उन्होंने उसकी रिसीविंग मांगी, लेकिन उन्हें प्राप्ति प्रमाण नहीं मिल सका। उन्होंने कहा कि किसी भी ज्ञापन की रिसीविंग मिलने से यह स्पष्ट होता है कि संबंधित कार्यालय या जनप्रतिनिधि के समक्ष मांग आधिकारिक रूप से दर्ज हुई है और भविष्य में उसकी प्रगति की जानकारी लेना आसान होता है।


उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता और जनप्रतिनिधियों के बीच संवाद की प्रक्रिया में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। ज्ञापनों की प्राप्ति का रिकॉर्ड रहने से नागरिकों को भी अपनी समस्याओं के समाधान की दिशा में जानकारी प्राप्त करने में सुविधा होती है।
आरटीआई कार्यकर्ता ने मांग की है कि जनप्रतिनिधियों के कार्यालयों में ज्ञापन प्राप्त करने और उसकी रसीद उपलब्ध कराने की स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे जनता की शिकायतों और मांगों का उचित रिकॉर्ड रखा जा सके।
वहीं, इस मामले को लेकर संबंधित पक्ष का पक्ष सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल ज्ञापन की रिसीविंग को लेकर उठे सवाल क्षेत्र में चर्चा का विषय बने हुए हैं।

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