अजय अनेजा 👉 संपादक उत्तराखंड जागरण 👉 रुद्रपुर 👉 🚨
रुद्रपुर में कानून बेबस: 10वीं की नाबालिग का अपहरण, रातों-रात जबरन शादी—विरोध पर परिवार की इज्जत तक रौंदी
रुद्रपुर, ऊधम सिंह नगर।
उत्तराखंड के रुद्रपुर से सामने आई यह घटना न सिर्फ दिल दहला देने वाली है, बल्कि समाज और कानून व्यवस्था दोनों को कठघरे में खड़ा करती है। एक 15 वर्षीय नाबालिग छात्रा को स्कूल के पास से अगवा कर लिया गया और उसी रात उसका जबरन विवाह करा दिया गया। जब परिजनों ने इस गैरकानूनी कृत्य का विरोध किया, तो उनके साथ अमानवीय व्यवहार करते हुए बेरहमी से मारपीट की गई।
📌 स्कूल से गायब हुई छात्रा, साजिश का हुआ खुलासा
पीड़ित पिता की तहरीर के अनुसार, उनकी बेटी रुद्रपुर में अपनी नानी के घर रहकर पढ़ाई कर रही थी। 23 अप्रैल को वह रोजाना की तरह स्कूल गई, लेकिन छुट्टी के बाद घर नहीं लौटी। चिंतित परिजनों ने जब खोजबीन शुरू की, तो पता चला कि एक युवक उसे बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया है।
📌 रातों-रात ‘शादी’ का खेल, बाल विवाह का खुला उल्लंघन
आरोप है कि उसी रात आरोपी के परिवार ने सुनियोजित साजिश के तहत नाबालिग छात्रा की जबरन शादी करवा दी। आरोपी की मां, दादी, बुआ और चाची ने मिलकर मांग भरवाकर उसे बहू घोषित कर दिया और घर में बंधक बना लिया। यह पूरा मामला स्पष्ट रूप से बाल विवाह और जबरन विवाह जैसे गंभीर अपराधों में आता है।
📌 विरोध पर टूटी बर्बरता—महिलाओं की अस्मिता पर हमला
जब छात्रा के पिता बेटी को छुड़ाने पहुंचे, तो उन्होंने पुलिस आने तक बच्ची को न रखने की बात कही। इस पर आरोपी पक्ष हिंसक हो गया। लाठी-डंडों से हमला कर दिया गया। इस दौरान छात्रा की मामी के साथ बेरहमी से मारपीट की गई और उनके कपड़े तक फाड़ दिए गए—जिससे उन्हें गहरी शारीरिक और मानसिक चोटें आईं।
📌 पुलिस हरकत में, लेकिन सवाल कायम
रुद्रपुर कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक मनोज रतूड़ी ने बताया कि पीड़ित पक्ष की शिकायत पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है।
📌 सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल
दिनदहाड़े स्कूल जाती छात्रा का अपहरण और फिर जबरन विवाह—यह घटना सुरक्षा तंत्र की गंभीर विफलता को उजागर करती है। स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है और वे आरोपियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
⚠️ समाज के नाम सवाल
क्या बेटियां अब स्कूल तक भी सुरक्षित नहीं?
क्या कानून का डर खत्म हो चुका है?
कब तक ऐसे मामलों में सिर्फ कार्रवाई के आश्वासन मिलते रहेंगे?
👉 अब नजरें पुलिस कार्रवाई पर टिकी हैं—क्या आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर पीड़िता को न्याय मिलेगा, या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?







