नैनीताल में मीट विवाद में हत्या के दोषी को उम्रकैद, अवैध खड़िया खनन पर हाईकोर्ट सख्त:पड़े पूरी खबर

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अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉 नैनीताल 👉 नैनीताल में मीट विवाद में हत्या के दोषी को उम्रकैद, अवैध खड़िया खनन पर हाईकोर्ट सख्त
नैनीताल और बागेश्वर जनपदों से बुधवार को न्यायिक और पर्यावरणीय मामलों से जुड़ी दो बड़ी खबरें सामने आई हैं। एक ओर नैनीताल जिले के पहाड़पानी क्षेत्र में धार्मिक कार्यक्रम के दौरान मीट में मिर्च अधिक होने को लेकर हुए विवाद में हत्या के मामले में अदालत ने आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई है, वहीं दूसरी ओर बागेश्वर जिले में अवैध खड़िया खनन और उससे प्रभावित गांवों के मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है।


मीट में मिर्च अधिक होने के विवाद ने ली थी जान
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय कुलदीप शर्मा की अदालत ने हत्या के आरोपी ललित मोहन चौसाली को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास तथा 50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा नहीं करने पर आरोपी को तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
अभियोजन पक्ष के अनुसार सात और आठ सितंबर 2019 की रात धारी तहसील के पहाड़पानी क्षेत्र स्थित कालीगढ़ी गधेरा में धार्मिक पूजा कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में भोजन के दौरान अशोक मेलकानी ने मीट में मिर्च अधिक होने की बात कही, जिस पर आरोपी ललित मोहन चौसाली नाराज हो गया। दोनों के बीच कहासुनी और धक्का-मुक्की हुई, हालांकि मौके पर मौजूद लोगों ने तत्काल विवाद शांत करा दिया था।
लेकिन पूजा स्थल से लौटते समय दोनों के बीच फिर विवाद हो गया। आरोप है कि आक्रोशित होकर ललित मोहन चौसाली ने चाकू से अशोक मेलकानी की छाती पर ताबड़तोड़ वार कर दिए, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
घटना के बाद मृतक के भाई बबलू मेलकानी ने पट्टी चौभेंसी राजस्व पुलिस में मुकदमा दर्ज कराया था। मामले की सुनवाई के दौरान सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता राम सिंह रौतेला ने अदालत में 12 गवाह पेश किए।
प्रत्यक्षदर्शियों के बयान बने अहम आधार
बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि बरामद चाकू पर मानव रक्त नहीं मिला और आरोपी को झूठा फंसाया गया है। हालांकि अदालत ने प्रत्यक्षदर्शी जगदीश चंद्र मिश्रा और राजेंद्र भट्ट के बयानों को विश्वसनीय माना। अदालत ने माना कि दोनों गवाहों ने आरोपी को घटनास्थल पर हाथ में चाकू लिए देखा था और उसने अपराध स्वीकार भी किया था।
न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि पूर्व शत्रुता नहीं होने के बावजूद मामूली विवाद ने हिंसक रूप ले लिया और हत्या जैसे गंभीर अपराध को जन्म दिया।
अवैध खड़िया खनन पर हाईकोर्ट की सख्ती
दूसरी ओर उत्तराखंड हाईकोर्ट में बागेश्वर जिले की कांडा तहसील समेत कई गांवों में अवैध खड़िया खनन से उत्पन्न दरारों और पर्यावरणीय नुकसान के मामलों पर सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने स्वतः संज्ञान जनहित याचिका सहित 165 खनन इकाइयों से जुड़े मामलों की संयुक्त सुनवाई की।
हाईकोर्ट ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से पूछा है कि जिन खनन इकाइयों पर रोक लगाई गई है, उनके खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई। न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की कि राज्य में अब तक स्टेट इन्वायरमेंट कमेटी का गठन नहीं किया गया है।
खंडपीठ ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के अनुरूप विस्तृत जवाब दाखिल करने के निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद तय की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला पर्वतीय क्षेत्रों में अनियंत्रित खनन, पर्यावरणीय क्षति और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर महत्वपूर्ण कानूनी बहस को जन्म दे सकता है।

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