लालकुआं में जल जीवन मिशन बना मजाक! बिना कनेक्शन के सूखे पड़े नल, शोपीस बनी पानी की टंकियां” अधिकारी मस्त जनता त्रस्त

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अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉 लालकुआं 👉 “लालकुआं में जल जीवन मिशन बना मजाक! बिना कनेक्शन के सूखे पड़े नल, शोपीस बनी पानी की टंकियां”
लालकुआं क्षेत्र में करोड़ों रुपये की जल जीवन मिशन योजना पर सवाल खड़े होने लगे हैं। एक ओर अधिकारी पहले चरण का काम लगभग पूरा होने का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर क्षेत्र के कई गांवों में लोगों को आज तक पानी के कनेक्शन तक नहीं मिल पाए हैं। हालात यह हैं कि कहीं पाइप लाइन अधूरी पड़ी है तो कहीं लाखों रुपये खर्च कर बनाई गई पानी की टंकियां सिर्फ शोपीस बनकर रह गई हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि जल जीवन मिशन के नाम पर सिर्फ कागजी कार्रवाई और बैठकों का खेल चल रहा है। कई गांवों में आज भी लोग बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान हैं। गर्मी बढ़ने के साथ पानी का संकट और गहरा गया है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों को जनता की परेशानी से कोई सरोकार नजर नहीं आ रहा।
जल संस्थान द्वारा लालकुआं डिवीजन की पेयजल योजनाओं का सोशल ऑडिट किए जाने और गांव-गांव बैठकें करने का दावा किया गया, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग दिखाई दे रही है। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारियों की टीम गांवों में पहुंचकर सिर्फ औपचारिकताएं निभा रही है, जबकि असली समस्या जस की तस बनी हुई है।
कई क्षेत्रों में पानी की टंकियां तैयार होने के बाद भी उनमें पानी नहीं पहुंच रहा। लोगों का कहना है कि जब घरों तक कनेक्शन ही नहीं दिए गए तो आखिर जल जीवन मिशन का लाभ जनता को कैसे मिलेगा? ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि योजना की धीमी रफ्तार और लापरवाही के कारण करोड़ों रुपये की परियोजनाएं सफेद हाथी साबित हो रही हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि लालकुआं की जनता को आखिर शुद्ध पेयजल कब मिलेगा? क्या जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी या फिर जनता यूं ही परेशान होती रहेगी?
क्षेत्रीय लोगों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि लालकुआं की पेयजल योजनाओं की निष्पक्ष जांच कर जल्द से जल्द घर-घर कनेक्शन और नियमित पानी की व्यवस्था सुनिश्चित की

अधिकारी मस्त जनता त्रस्त

 

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