अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉 लालकुआं 👉 हल्दुचौड़ं 👉 बिन्दुखत्ता 👉
दुर्गापालपुर में 8 लाख की चोरी के बाद उठे सवाल: चिल्लर कबाड़ियों, खानाबदोशों और बाहरी लोगों के सत्यापन में ढिलाई कहीं अपराधियों को तो नहीं दे रही खुली छूट?
लालकुआं, हल्दूचौड़ और बिंदुखत्ता में बढ़ता बाहरी लोगों का आवागमन बना चिंता का विषय, ग्रामीण बोले—सिर्फ अभियान नहीं, चाहिए स्थायी निगरानी व्यवस्था
लालकुआं। हल्दूचौड़ के दुर्गापालपुर परमा फेस-1 में हुई करीब 8 लाख रुपये की चोरी की सनसनीखेज वारदात के बाद क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और सत्यापन प्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। पुलिस जांच अपने स्तर पर जारी है, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर लालकुआं, हल्दूचौड़, बिंदुखत्ता और आसपास के क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहे बाहरी व्यक्तियों, चिल्लर कबाड़ियों, फेरी वालों और अस्थायी रूप से रह रहे लोगों के सत्यापन के मुद्दे को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में क्षेत्र में घूम-घूमकर कबाड़ खरीदने वाले लोगों की संख्या तेजी से बढ़ी है। इसके अलावा कई बाहरी व्यक्ति फेरी लगाने, मजदूरी करने अथवा छोटी-बड़ी दुकानें संचालित करने के लिए क्षेत्र में आकर रह रहे हैं। लोगों का आरोप है कि इनमें से बड़ी संख्या में व्यक्तियों का पुलिस सत्यापन नहीं हुआ है या फिर सत्यापन प्रक्रिया प्रभावी ढंग से लागू नहीं हो रही।
ग्रामीणों का कहना है कि जब भी चोरी, लूट या अन्य आपराधिक घटनाएं होती हैं, तब पुलिस और प्रशासन सत्यापन अभियान चलाने की बात करते हैं, लेकिन कुछ समय बाद यह अभियान धीमा पड़ जाता है। ऐसे में क्षेत्र में रहने वाले लोगों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर बढ़ती संदिग्ध गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी क्यों नहीं हो पा रही।
हालांकि, किसी भी चोरी की घटना को सीधे किसी विशेष वर्ग, समुदाय या पेशे से जोड़ना उचित नहीं होगा और मामले की जांच पुलिस द्वारा साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है। लेकिन स्थानीय नागरिकों का मानना है कि नियमित सत्यापन, किरायेदारों का रिकॉर्ड, फेरी वालों की पहचान और कबाड़ी कारोबार से जुड़े लोगों की निगरानी व्यवस्था मजबूत होने से अपराधों पर काफी हद तक अंकुश लगाया जा सकता है।
दुर्गापालपुर की चोरी ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या लालकुआं, हल्दूचौड़ और बिंदुखत्ता क्षेत्र में चल रहे सत्यापन अभियान पर्याप्त हैं, या फिर इन्हें और अधिक व्यापक तथा प्रभावी बनाने की जरूरत है। अब लोगों की निगाहें न सिर्फ चोरी के खुलासे पर, बल्कि प्रशासन द्वारा सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठाए जाने वाले ठोस कदमों पर भी टिकी हैं।
