बनभूलपुरा हल्द्वानी में फर्जी फाइनेंस कंपनी का बड़ा खेल: लोन दिलाने के नाम पर गरीबों से लाखों की ठगी

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अथय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉 हल्द्वानी 👉
हल्द्वानी में ‘लोन’ के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा: गरीबों से लाखों ऐंठकर फरार हुआ जालसाज गिरोह, बनभूलपुरा में मचा हड़कंप
हल्द्वानी। बनभूलपुरा क्षेत्र में आसान लोन दिलाने का झांसा देकर गरीब और जरूरतमंद परिवारों से लाखों रुपये की ठगी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि आईएनसी फिनटेक प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर किराये के मकान में कार्यालय खोलकर एक महिला समेत चार-पांच लोगों के गिरोह ने दर्जनों लोगों से फाइल चार्ज के नाम पर चार-चार हजार रुपये वसूले और फिर ऑफिस बंद कर फरार हो गए।
जानकारी के अनुसार, गौजाजाली क्षेत्र में संचालित इस कथित माइक्रो फाइनेंस कंपनी ने लोगों से आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य दस्तावेज लेकर 40 हजार से 60 हजार रुपये तक का लोन दिलाने का दावा किया। इसके बदले प्रत्येक आवेदक से चार हजार रुपये जमा कराए गए और 4 जुलाई तक लोन खाते में आने का भरोसा दिया गया।
जब तय तारीख गुजर गई और किसी के खाते में पैसा नहीं पहुंचा तो सोमवार रात बड़ी संख्या में पीड़ित कार्यालय पहुंचे। वहां ऑफिस पर ताला लटका मिला और अंदर केवल मेज-कुर्सियां थीं। इसके बाद मौके पर हंगामा हो गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने लोगों को शांत कराया।
इंद्रानगर निवासी वकील अहमद की तहरीर पर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। शिकायत में बताया गया है कि गिरोह में एक महिला और चार पुरुष शामिल थे, जो खुद को गुजरात का निवासी बताते थे।
एसपी सिटी मनोज कुमार कत्याल ने बताया कि अब तक करीब 20 लोगों की शिकायत मिली है। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। हालांकि स्थानीय लोगों का दावा है कि ठगी के शिकार लोगों की संख्या 100 के करीब हो सकती है और ठगी की रकम लाखों रुपये में है।
मकान मालिक भी जांच के घेरे में
जांच में यह भी सामने आया है कि जिस मकान से कथित कंपनी संचालित हो रही थी, उसके मालिक ने किरायेदारों का पुलिस सत्यापन नहीं कराया था। पुलिस सत्यापन न कराने पर कार्रवाई की तैयारी कर रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस पूरे मामले में मकान मालिक की कोई भूमिका तो नहीं है।
गरीब परिवारों की टूटी उम्मीद
पीड़ितों का कहना है कि अधिक लोन पाने की उम्मीद में एक ही परिवार के दो से चार सदस्यों के नाम से आवेदन कराए गए और सभी से अलग-अलग चार हजार रुपये लिए गए। अब लोन तो नहीं मिला, लेकिन उनकी मेहनत की कमाई भी ठग लेकर फरार हो गए।
उत्तराखंड जागरण की अपील: किसी भी कंपनी या संस्था को लोन के नाम पर अग्रिम शुल्क (Processing/File Charge) देने से पहले उसकी वैधता और सरकारी पंजीकरण की पूरी जांच अवश्य करें।

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