नैंसी कॉन्वेंट के डायरेक्टर की स्कॉर्पियो बनी काल, गोरापड़ाव-बेरीपड़ाव के चार युवकों की दर्दनाक मौत से परिवार जनों में दुखो का टुटा पहाड़

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अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉 हल्द्वानी 👉

हल्द्वानी। शनिवार देर रात तीनपानी-लालकुआं बाईपास फ्लाईओवर पर हुए भीषण सड़क हादसे में गोरापड़ाव और बेरीपड़ाव के चार युवकों की दर्दनाक मौत हो गई। तेज रफ्तार स्कॉर्पियो ने स्कूटी सवार चारों युवकों को कुचल दिया। हादसा इतना भयावह था कि तीन युवकों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि चौथे युवक की उपचार के दौरान एसटीएच अस्पताल में मौत हो गई।

पुलिस के अनुसार, शनिवार रात करीब 10 बजे हादसे की सूचना मिली। मौके पर 17 वर्षीय राहुल राजपूत पुत्र किशन पाल निवासी हाथीखाल गोरापड़ाव, 25 वर्षीय शिवम पुत्र बाबूराम निवासी गोरापड़ाव, 20 वर्षीय अंशु आर्य पुत्र पंकज आर्य निवासी बेरीपड़ाव तथा 18 वर्षीय आदित्य टम्टा निवासी गोरापड़ाव गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिले। पास में उनकी क्षतिग्रस्त स्कूटी भी पड़ी थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, लालकुआं की ओर से आ रही तेज रफ्तार और बेकाबू स्कॉर्पियो ने चारों युवकों को जोरदार टक्कर मारते हुए कुचल दिया।

सूचना मिलते ही पुलिस ने सभी घायलों को तत्काल डॉ. सुशीला तिवारी चिकित्सालय पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने राहुल राजपूत, शिवम और अंशु आर्य को मृत घोषित कर दिया। गंभीर रूप से घायल आदित्य टम्टा को आईसीयू में भर्ती कराया गया, लेकिन देर रात करीब एक बजे उसने भी दम तोड़ दिया। आदित्य, कालाढूंगी थाने में तैनात उपनिरीक्षक महेंद्र प्रसाद के चचेरे भाई का पुत्र था।

प्रारंभिक पुलिस जांच में सामने आया है कि हादसे के समय स्कॉर्पियो की पिछली सीट पर ज्योलीकोट स्थित नैंसी कॉन्वेंट के डायरेक्टर डॉ. संजय सिंह सवार थे, जबकि वाहन उनका चालक पहदान खान चला रहा था। हादसे के बाद पुलिस ने चालक और डायरेक्टर दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।

एसपी सिटी मनोज कत्याल ने बताया कि दुर्घटना के कारणों की गहन जांच की जा रही है। घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है और प्रत्यक्षदर्शियों से भी पूछताछ की जा रही है। जांच के आधार पर अग्रिम कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इस हृदयविदारक हादसे से गोरापड़ाव और बेरीपड़ाव क्षेत्र में मातम पसरा हुआ है। एक ही हादसे में चार युवकों की मौत से पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है और मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

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