हाईकोर्ट का सख्त रुख: छात्राओं से अतिरिक्त फीस वसूली पर मांगा हिसाब, आरटीआई क्लब से दस्तावेज तलब

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अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉

 

 

हाईकोर्ट का सख्त रुख: छात्राओं से अतिरिक्त फीस वसूली पर मांगा हिसाब, आरटीआई क्लब से दस्तावेज तलब
देहरादून। सीएनआई गर्ल्स इंटर कॉलेज, देहरादून में कक्षा 6 से 12 तक की छात्राओं से निर्धारित फीस के अलावा डीजल, कॉलेज रखरखाव, हेल्पर टीचर और अन्य मदों के नाम पर अतिरिक्त शुल्क वसूले जाने के मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने मामले में याचिकाकर्ता संस्था आरटीआई क्लब से कॉलेज की ओर से ली जा रही फीस से संबंधित दस्तावेज अतिरिक्त शपथपत्र के माध्यम से न्यायालय के समक्ष पेश करने को कहा है।
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ के समक्ष हुई। जनहित याचिका में आरटीआई क्लब की ओर से आरोप लगाया गया है कि सीएनआई गर्ल्स इंटर कॉलेज प्रबंधन द्वारा कक्षा 6 से 12 तक अध्ययनरत छात्राओं से निर्धारित कॉलेज फीस के अतिरिक्त विभिन्न मदों में रकम ली जा रही है।
याचिका के अनुसार छात्राओं से डीजल, कॉलेज के मेंटेनेंस, हेल्पर टीचर और अन्य जरूरतों के नाम पर अतिरिक्त शुल्क मांगा जा रहा है। इससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। याचिकाकर्ता का कहना है कि कई अभिभावक इस अतिरिक्त राशि का भुगतान करने की स्थिति में नहीं हैं, जबकि वे कॉलेज द्वारा निर्धारित नियमित फीस समय पर जमा करते आ रहे हैं।
आरटीआई क्लब ने हाईकोर्ट के समक्ष यह भी तर्क रखा कि जब अभिभावक निर्धारित फीस का भुगतान कर रहे हैं तो कॉलेज प्रबंधन द्वारा उसके अतिरिक्त अलग-अलग मदों के नाम पर शुल्क वसूलने का अधिकार क्या है, यह स्पष्ट होना चाहिए। याचिका में अतिरिक्त फीस की वसूली पर रोक लगाने की मांग की गई है।
मामले को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता संस्था को निर्देश दिया कि कॉलेज द्वारा वसूली जा रही फीस से जुड़े दस्तावेज और अन्य संबंधित अभिलेख अतिरिक्त शपथपत्र के माध्यम से कोर्ट में प्रस्तुत किए जाएं। इन दस्तावेजों के सामने आने के बाद यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि अतिरिक्त शुल्क किस आधार पर लिया जा रहा है और उसकी वैधानिक स्थिति क्या है।
फिलहाल हाईकोर्ट के रुख के बाद कॉलेज की ओर से छात्राओं से निर्धारित शुल्क के अतिरिक्त वसूली जा रही रकम को लेकर मामला चर्चा में आ गया है। अब कोर्ट में पेश होने वाले दस्तावेजों पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

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