बिंदुखत्ता वन अधिकार समिति का शासन पर तीखा हमला: केंद्र के पत्र दबाकर मामले को कानूनी पेच में उलझा रहा उत्तराखंड शासन

अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉 लालकुआं 👉 बिन्दुखत्ता 👉 

केंद्र के पत्र दबाकर बिंदुखत्ता को कानूनी पेच में फंसा रहा शासन: वक्ता

19वें दिन बारिश में भी नहीं थमा आंदोलन, 250 से अधिक परिवारों से संपर्क; 27 सितंबर की रैली को सफल बनाने का आह्वान

बिंदुखत्ता, 2 सितंबर। बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर 15 अगस्त से जारी पदयात्रा बुधवार को 19वें दिन भी पूरे जोश के साथ जारी रही। भारी बारिश और मौसम विभाग के अलर्ट के बावजूद सैकड़ों महिला, पुरुष और बच्चे छाता लेकर पदयात्रा में शामिल हुए। खुरियाखत्ता से शुरू हुई पदयात्रा टूटीपुलिया होते हुए शीशमभुजिया पहुंची। इस दौरान आंदोलनकारियों ने 250 से अधिक परिवारों से संपर्क कर 27 सितंबर को शहीद स्मारक पर प्रस्तावित विशाल रैली में पहुंचने का आह्वान किया।

शीशमभुजिया में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने उत्तराखंड शासन की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि 19 जून 2024 को जिला स्तरीय समिति ने वन अधिकार अधिनियम के तहत बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम बनाने और बंदोबस्ती की प्रक्रिया के लिए दावा सर्वसम्मति से शासन को भेजा था। इसके बावजूद दो वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी राजस्व ग्राम की अधिसूचना जारी नहीं की गई है।

वक्ताओं ने आरोप लगाया कि अधिसूचना जारी करने के बजाय राजस्व सचिव द्वारा पत्रावली को वन अधिकार कानून के प्रावधानों के विपरीत दोबारा परीक्षण के लिए भेज दिया गया। उन्होंने कहा कि वन अधिकार समिति द्वारा लगातार पत्राचार किए जाने के बावजूद राज्य स्तरीय निगरानी समिति (SLMC) द्वारा इन पत्रों का संज्ञान नहीं लिया जा रहा है। वहीं, जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से बिंदुखत्ता के संबंध में भेजे गए पत्रों पर भी शासन स्तर से प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है।

वक्ताओं ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से बिंदुखत्ता के पक्ष में लगातार पत्र भेजे जाने के बावजूद शासन द्वारा मामले को सुलझाने के बजाय लगातार कानूनी पेच में उलझाया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि केंद्र के पत्रों और जिला स्तरीय समिति के सर्वसम्मत निर्णय को गंभीरता से लिया जाता तो बिंदुखत्ता का मामला अब तक लंबित नहीं रहता।

सभा में वक्ताओं ने चेतावनी दी कि सरकार ने यदि समय रहते बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम बनाने की अधिसूचना जारी नहीं की तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अब ग्रामीण पीछे हटने वाले नहीं हैं और आगामी 27 सितंबर की रैली के जरिए सरकार को अपनी ताकत का अहसास कराया जाएगा।

पदयात्रा में संगठन अध्यक्ष उमेश भट्ट, अर्जुन नाथ गोस्वामी, बलन्त बिष्ट, ममता बिष्ट, रमेश गोस्वामी, दौलत सिंह कोरंगा, बलवन्त परिहार, नन्दन बोरा, दीपक रौतेला, केदार सिंह कोरंगा, कुन्दन सिंह कोरंगा, गोविन्द गिरी, भवान सिंह कठायत, दानी कोरंगा, भास्करानन्द तिवारी, हरीश रौतेला, राज्य आंदोलनकारी प्रकाश, नन्दन जग्गी, खीम सिंह कोरंगा, सोहन लाल, जे.सी. उप्रेती, भुपेश जोशी, दौली कोरंगा, रमा देवी, शोभा कोरंगा, हयात सिंह कोरंगा, रिया मेहता, प्रेमा मेहता, जसुली देवी, तारा देवी, चम्पा कोरंगा, लीला देवी, भागीरथी देवी, बसन्ती कोरंगा, गीता देवी, लक्ष्मी देवी, लक्ष्मी मेहता, तुलसी देवी, आनन्दी देवी और मोहनी मेहता सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी मौजूद रहे।

बारिश के बीच निकली पदयात्रा ने एक बार फिर साफ कर दिया कि बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा देने की मांग अब केवल कुछ लोगों की आवाज नहीं, बल्कि व्यापक जनआंदोलन का रूप ले चुकी है।