अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉 हल्द्वानी 👉
हाई कोर्ट के लिए बेल बाबा में कटेंगे 123 पेड़, हजारों पौधों पर भी चलेगी कुल्हाड़ी
निर्माण की जमीन चिह्नित करने में जुटा प्रशासन, पीडब्ल्यूडी और वन विभाग; जमीन की कीमत से लेकर एनपीवी तक का हो रहा आकलन
हल्द्वानी। उत्तराखंड हाई कोर्ट को हल्द्वानी शिफ्ट करने की कवायद अब बेल बाबा मंदिर के सामने प्रस्तावित स्थल तक पहुंच गई है। हाई कोर्ट भवन निर्माण के लिए चिह्नित जमीन पर 123 पेड़ों की कटाई और हजारों पौधों को हटाने की तैयारी है। निर्माण से पहले वन भूमि के हस्तांतरण समेत तमाम प्रक्रियाओं को पूरा करने के लिए प्रशासन, लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) और वन विभाग की टीमें अलग-अलग चरणों में सर्वे कर रही हैं।
बेल बाबा मंदिर के सामने तराई केंद्रीय वन प्रभाग की भाखड़ा रेंज के अंतर्गत आने वाली जमीन पर हाई कोर्ट निर्माण को पिछले महीने राज्य कैबिनेट से मंजूरी मिली थी। इसके बाद अब संबंधित विभाग प्रस्तावित निर्माण स्थल को चिह्नित करने और भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने में जुटे हैं।
123 पेड़ों की सूची तैयार, हजारों पौधे भी हटेंगे
सर्वे के दौरान प्रस्तावित निर्माण स्थल पर 123 पेड़ चिह्नित किए गए हैं, जिन्हें निर्माण कार्य के लिए काटना पड़ेगा। पेड़ों के अलावा क्षेत्र में मौजूद हजारों छोटे-बड़े पौधों को भी हटाया जाना प्रस्तावित है। इससे निर्माण शुरू होने से पहले वन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर वनस्पति हटाने की कार्रवाई करनी होगी।
वन विभाग की ओर से अब पेड़ों और जमीन की कीमत का आकलन किया जा रहा है। इसके तहत प्रोजेक्ट की नेट प्रजेंट वैल्यू (एनपीवी) निकाली जा रही है। एनपीवी के आधार पर निर्धारित होने वाली धनराशि की अदायगी के लिए प्रस्ताव पीडब्ल्यूडी को भेजा जाएगा।
जमीन की कीमत भी तय होगी
हाई कोर्ट निर्माण के लिए इस्तेमाल होने वाली जमीन की वैल्यू भी निकाली जा रही है। वन भूमि हस्तांतरण से जुड़ी औपचारिकताओं के तहत जमीन, पेड़ों और पर्यावरणीय क्षति से संबंधित देयताओं का आकलन किया जा रहा है। विभागीय स्तर पर आंकड़े तैयार होने के बाद आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
बदले में दूसरी जमीन पर होगा पौधरोपण
वन भूमि के बदले मिलने वाली जमीन पर पौधरोपण की प्रक्रिया भी प्रस्ताव का हिस्सा होगी। वन विभाग यह आकलन कर रहा है कि वैकल्पिक जमीन पर पौधरोपण करने और उसे विकसित करने में कितनी धनराशि खर्च होगी। इसके बाद संबंधित विभागों के बीच भुगतान और भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
तराई केंद्रीय वन प्रभाग के डीएफओ यूसी तिवारी ने बताया कि जमीन हस्तांतरण को लेकर सभी जरूरी प्रक्रियाओं का पालन किया जाएगा। विभाग की ओर से एनपीवी समेत अन्य आवश्यक आकलन किए जा रहे हैं।
हाई कोर्ट के प्रस्तावित नए परिसर को लेकर जहां निर्माण की तैयारियां तेज हो रही हैं, वहीं 123 पेड़ों की कटाई और हजारों पौधों को हटाए जाने का मुद्दा पर्यावरणीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब निगाह इस बात पर है कि भूमि हस्तांतरण और वन विभाग की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद निर्माण की कार्रवाई कब शुरू होती है।

