धाकड़ धामी का ‘साइलेंट स्ट्राइक’ मॉडल: बिना शोर बड़े फैसले, UCC से लेकर अतिक्रमण, मदरसा सुधार और धर्मांतरण कानून तक चर्चा में उत्तराखंड

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अजय अनेजा 👉 पत्रकार संपादक उत्तराखंड जागरण 👉  धाकड़ धामी का ‘साइलेंट स्ट्राइक’ मॉडल: बिना शोर बड़े फैसले, UCC से लेकर अतिक्रमण, मदरसा सुधार और धर्मांतरण कानून तक चर्चा में उत्तराखंड

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कार्यकाल में लिए गए कई बड़े निर्णय राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बने। समर्थक इन्हें ‘धाकड़ धामी मॉडल’ बता रहे हैं, जबकि विपक्ष कुछ फैसलों पर सवाल भी उठा रहा है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एक बार फिर अपने फैसलों को लेकर सुर्खियों में हैं। समर्थकों का दावा है कि धामी सरकार ने बिना ज्यादा राजनीतिक शोर-शराबे के कई ऐसे बड़े और कड़े फैसले लिए हैं, जिनकी गूंज पूरे देश में सुनाई दे रही है। इसी वजह से सोशल मीडिया पर उन्हें “धाकड़ धामी” और “साइलेंट स्ट्राइक वाले मुख्यमंत्री” जैसे नामों से भी संबोधित किया जा रहा है।
धामी सरकार के कार्यकाल में राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया गया, जिससे उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना जहां यह व्यवस्था लागू हुई। सरकार का कहना है कि इससे सभी नागरिकों को समान कानूनी अधिकार सुनिश्चित होंगे।
वहीं सरकारी आंकड़ों के अनुसार राज्यभर में अवैध अतिक्रमण के खिलाफ बड़े स्तर पर अभियान चलाकर कई अवैध निर्माण और धार्मिक ढांचों को हटाया गया तथा हजारों हेक्टेयर सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया गया।
शिक्षा क्षेत्र में भी सरकार ने मदरसों के आधुनिकीकरण पर जोर दिया है। नई व्यवस्था के तहत आधुनिक शिक्षा जैसे गणित, विज्ञान, अंग्रेजी और कंप्यूटर को प्राथमिकता देने की दिशा में कदम उठाए गए हैं, जबकि धार्मिक शिक्षा अलग समय में संचालित किए जाने का प्रावधान किया गया है।
कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर भी धामी सरकार ने दंगों के दौरान सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों से क्षतिपूर्ति वसूलने संबंधी सख्त प्रावधान लागू किए हैं। इसके अलावा धर्मांतरण विरोधी कानून को और कठोर बनाते हुए दोषियों के लिए कड़ी सजा और जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
समर्थकों का कहना है कि मुख्यमंत्री धामी ने शांत और संयमित शैली में ऐसे निर्णय लिए हैं, जिनका प्रभाव केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी महसूस किया जा रहा है। वहीं विपक्ष इन फैसलों के विभिन्न पहलुओं पर लगातार सवाल उठाता रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने कार्यकाल में प्रशासनिक सख्ती, कानून-व्यवस्था और नीतिगत सुधारों के जरिए अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश की है। आने वाले समय में इन फैसलों का राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव कितना व्यापक होगा, इस पर सभी की नजर बनी रहेगी।

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